दूध निर्यात पर रोक से नेपाल में पशुपतिनाथ उत्सव प्रभावित
काठमांडू, 20 फरवरी (आईएएनएस)। दूध के निर्यात पर भारतीय रोक से नेपाल में पशुपतिनाथ महोत्सव बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। दो मार्च को महाशिवरात्रि के अवसर पर 7वीं शताब्दी के इस धार्मिक स्थल पर भारत सहित दुनिया के अन्य देशों से हजारों की तादाद में हिन्दू श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
महाशिवरात्रि के दौरान दूध से देवी-देवताओं का स्नान और दूध से बनी मिठाइयां ही भोग लगाने का प्रावधान है। लेकिन भारत द्वारा दूध और दुग्ध पदार्थो के निर्यात पर रोक लगाने से पशुपतिनाथ उत्सव प्रभावित हो रहा है।
नेपाल के डेयरी उद्योग ने भारत सरकार के इस फैसले पर निराशा जताई है। भारत ने अपने घरेलू बाजार में दूध और दुग्ध उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए इसके निर्यात पर रोक लगाई है। रोक मध्य फरवरी से प्रभावी होगी और अगली सूचना तक जारी रहेगी।
नेपाल के डेयरी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (डीडीसी) के अनुसार करीब 5,000 मीट्रिक टन पाउडर वाला दूध हर साल भारत से आयात होता है। ठंड और गर्मी के दौरान नेपाल में दूध का उत्पादन काफी कम हो जाता है और भारत से होने वाली आपूर्ति पर इसकी निर्भरता बढ़ जाती है।
आर्थिक अभियान समाचार पत्र ने रविवार को डीडीसी प्रमुख कृष्ण गोपाल श्रेष्ठ के हवाले से लिखा है कि भारत द्वारा दूध के निर्यात पर रोक लगाए जाने के कारण इन दिनों नेपाल में दूध का उत्पादन और आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
अकेले काठमांडू में 600,000 लीटर दूध की प्रतिदिन जरूरत होती है, जबकि डीडीसी 140,000 लीटर ही उपलब्ध करा पाता है। बाकी जरूरतें निजी डेयरी और किसानों द्वारा बेचे जाने वाले दूध से पूरी होती हैं।
दूध की मांग और आपूर्ति में अंतर को पाटने के लिए सरकार दक्षिणी नेपाल के चितवन इलाके में नई डेयरी का निर्माण करा रही है। इसके शुरू होने के बाद नेपाल में 500,000 टन वार्षिक उत्पादन हो सकेगा।
भारतीय योग गुरु बाबा रामदेव ने नेपाल में दूध उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए उसे 50,000 गाय और 2,000 भैंस देने की बात कही है, लेकिन सीमा संबंधी बाधाओं के करण अब तक गाय या भैंस नेपाल नहीं पहुंच पाई हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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