पहले ही दिन बोलने को मिलता तो नहीं होता व्यवधान: आडवाणी
आडवाणी ने रविवार को अपने ब्लॉग पर किए गए ताजा पोस्ट में वर्ष 2010 को घोटालों का वर्ष करार दिया है। उन्होंने कहा है कि लोकसभा में शीतकालीन सत्र के पहले दिन से ही पूरे विपक्ष ने मुख्य रूप से तीन मुद्दों को ही उठाने का फैसला किया था, जिसमें राष्ट्रमंडल घोटाला, 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला और मुम्बई रक्षा भूमि घोटाला शामिल है।
आडवाणी ने कहा, "यदि पहले दिन ही विपक्ष को अपनी बात कहने का मौका दिया गया होता तो सत्र के दौरान जो गतिरोध पैदा हुआ, वह नहीं हुआ होता। अधिकांश विपक्षी दल इस बात पर सहमत थे कि जब तक सरकार इन घोटालों की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से नहीं कराती तब तक सदन का कामकाज नहीं चलने दिया जाएगा।"
आडवाणी ने कहा कि सरकार और लोकसभा अध्यक्ष ने इस गतिरोध को तोड़ने के लिए कई दौर की बैठकें आयोजित की लेकिन वे इसमें सफल नहीं हुए। बजट सत्र शुरू होने से पहले भी सरकार, विपक्षी दलों के साथ बैठक कर रही है। सरकार को यह महसूस हो रहा है कि इन परिस्थतियों में जेपीसी का गठन ही सही विकल्प होगा।
आडवाणी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा चलाई गई सरकार का खासतौर पर उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी के शासनकाल के दौरान राजग ने सरकार को सही तरीके से चलाते हुए तीन नए राज्यों झारखण्ड, उत्तरांचल और छत्तीसगढ़ का निर्माण किया।
उन्होंने कहा कि यदि हमारे गठबंधन का प्रमुख सहयोगी दल तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) उस समय सहमत हो गई होती तो हम आसानी से तेलंगाना का भी निर्माण कर देते। लेकिन गठबंधन धर्म ने हमें इसकी इजाजत नहीं दी।
आडवाणी ने परोक्ष रूप से प्रधानमंत्र मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि न तो वाजपेयी सरकार और न ही राजग की किसी राज्य सरकार ने गठबंधन धर्म के नाम पर कभी भी सुशासन से समझौता किया। ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले दिनों समाचार चैनलों के सम्पादकों से बातचीत के दौरान गठबंधन सरकार की मजबूरियों को हवाला देते हुए कुछ मुद्दों पर अपने हाथ बंधे होने की बात कही थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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