भारत-बांग्लादेश परिक्षेत्रों की अदला-बदली के लिए गम्भीर
दोनों देशों में कुल 162 परिक्षेत्र हैं। 111 भारत में और 51 बांग्लादेश में। यहां कुल 144,000 लोग निवास करते हैं और यह 17,158 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। ये परिक्षेत्र 1947 में हुए भारत विभाजन की विरासत हैं।
बांग्लादेश के गृह मंत्रालय के सूत्रों ने समाचार पत्र 'द डेली स्टार' को बताया कि संयुक्त सीमा कार्यकारी समूह की हाल की बैठकों में 6.5 किलोमीटर लम्बी अनिर्धारित सीमा, 162 परिक्षेत्रों और दोनों देशों में स्थित 6,500 एकड़ विवादित भूमि के दीर्घकालिक विवाद को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
सूत्रों ने कहा कि चूंकि परिक्षेत्रों की अदला-बदली में कोई बहुत जटिलता नहीं है, लिहाजा दोनों पक्ष सबसे पहले इस मुद्दे को सुलझाने और अनिर्धारित सीमा व विवादित भू-क्षेत्र पर बातचीत जारी रखने को राजी हो गए है।
अखबार ने एक राजनयिक सूत्रों के हवाले से कहा है कि इस वर्ष प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रस्तावित दौरे के लिए समय के भीतर समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई सारी बैठकें निर्धारित की गई हैं।
गैरसरकारी आंकड़ों के अनुसार 111 भारतीय परिक्षेत्रों की आबादी 100,000 से अधिक है, जबकि भारत के भीतर 51 बांग्लादेशी परिक्षेत्रों की आबादी लगभग 44,000 है।
सीमा के दोनों तरफ स्थित परिक्षेत्रों के निवासियों के सामने यह तय करने का विकल्प होगा कि वे किस देश में रहना चाहते हैं। सूत्रों ने कहा है कि परिक्षेत्रों के अधिकांश निवासियों ने इसके पहले आदान-प्रदान की योजना के तहत अपनी नागरिकता बदलने की रजामंदी जताई थी।
इतिहासकारों का कहना है कि ये भू-क्षेत्र कूच बिहार और रंगपुर के राजाओं के बीच खेले गए शतरंज पर लगाए गए भारी दांव के हिस्से हैं। दोनों राजाओं ने इन क्षेत्रों को हारे हुए दांव के भुगतान के रूप में एक-दूसरे को सौंप दिया था।
सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि भारत के 111 एनक्लेव (17,158 एकड़ भूमि) बांग्लादेश के पंचगढ़, लालमोनिरहाट, कुड़ीग्राम और नीलफामारी जिलों में स्थित हैं।
दूसरी ओर बांग्लादेश के 51 परिक्षेत्र (7,110 एकड़ भूमि) भारत में पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में स्थित हैं।
वर्ष 1974 में बांग्लादेश ने समस्या के समाधान के लिए मुजीब-इंदिरा भू सीमा समझौते को लागू कर दिया था, लेकिन भारत ने अभी तक इस समझौते को लागू नहीं किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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