सत्ता परिवर्तन में उत्प्रेरक का काम कर सकता है भ्रष्टाचार का मुद्दा : आडवाणी

आडवाणी ने रविवार को अपने ब्लॉग पर किए ताजा पोस्ट में उस समय की स्थिति को बयां किया है जब जयप्रकाश नारायण द्वारा इंदिरा गांधी के खिलाफ चलाए गए आंदोलन में विपक्षी दलों ने उनका साथ दिया था।

आडवाणी ने कहा कि 70 के दशक में पहली बार गुजरात में छात्रों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन खड़ा किया था। इससे प्रेरित होकर बिहार में छात्रों के साथ मिलकर जयप्रकाश नारायण ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन खड़ा किया। उन दिनों वह कहा करते थे कि आम जीवन में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ें कांग्रेस सरकार में थी।

उन्होंने कहा, "भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए गए अभियान का ही नतीजा था कि जयप्रकाश पहली बार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सम्पर्क में और फिर आरएसएस के सम्पर्क में आए थे। चुनावी सुधारों को लेकर ही जयप्रकाश नारायण के साथ मेरी भी बैठक हुई थी। उस समय भी कांग्रेस सरकार में भ्रष्टाचार फैला हुआ था।"

आडवाणी ने विपक्षी दलों की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब तक समूचा विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट नहीं होगा तब तक इससे नहीं निपटा जा सकता।

पुराने दिनों की याद ताजा करते हुए आडवाणी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में जनसंघ, कांग्रेस (ओ), सोशलिस्ट पार्टी और भारतीय लोक दल (बीएलडी) भी एक साथ खड़े हुए थे।

उन्होंने कहा कि आज जो दो ध्रुवीय राजनीति बनी है, इसके बीज तो आपातकाल के बाद पड़ गए थे। इससे स्पष्ट होता है कि राजनीतिक इतिहास में भ्रष्टाचार के मुद्दे ने ही पहली बार सत्ता परिवर्तन के लिए एक बड़े उत्प्रेरक के तौर पर काम किया था।

आडवाणी ने कहा कि यह देखना आश्चर्यजनक नहीं होगा कि संविधान लागू होने के छह दशकों बाद यदि एक बार फिर भ्रष्टाचार का मुद्दा ही सत्ता परिवर्तन में उत्प्रेरक का काम करे।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010 में राष्ट्रमंडल खेल घोटाला, 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला और आदर्श सोसाइटी घोटाला सामने आने के बाद शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में काफी हंगामा हुआ था। 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने को लेकर समूचे विपक्ष ने सरकार को एकसाथ घेरा था, जिससे संसद की कार्यवाही कई दिनों तक नहीं चल पाई थी। बजट सत्र से पहले विपक्ष को एस बैंड घोटाले के रूप में सरकार को घेरने के लिए एक नया मुद्दा मिल गया है।

उधर, बजट सत्र को ध्यान में रखते हुए सरकार किसी भी तरह के हंगामे से बचने के लिए जेपीसी की मांग को लेकर राजी होती नजर आ रही है। विपक्ष ने पहले ही आगाह कर दिया है कि सरकार जब तक जेपीसी से जांच कराने की मांग स्वीकार नहीं करती तब तक संसद नहीं चलने दी जाएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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