अगवा जिलाधिकारी सुरक्षित, रविवार को शुरू होगी वार्ता

Naxalites
भुवनेश्वर/हैदराबाद। नक्सलियों द्वारा बुधवार को अगवा जिलाधिकारी और जूनियर इंजीनियर सुरक्षित हैं। दोनों अधिकारियों की रिहाई के लिए रविवार को नक्सलियों के साथ औपचारिक वार्ता शुरू हो सकती है। नक्सलियों के साथ बातचीत करने के लिए मध्यस्थ यहां पहुंचने वाले हैं।

राज्य के मुख्य सचिव बी.के. पटनायक ने शनिवार को बताया, "हमें अब तक जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक अगवा किए गए दोनों व्यक्ति सुरक्षित हैं और उनका स्वास्थ्य ठीक है।"

ज्ञात हो कि जिलाधिकारी आर. विनील कृष्णा और जूनियर इंजीनियर पवित्र मोहन माझी को नक्सलियों ने बुधवार शाम को अगवा कर लिया था। राज्य में पहली बार नक्सलियों ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी को अगवा किया है। राज्य सरकार ने शिक्षाविदों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं आर.एस. राव और हरगोपाल से अधिकारियों की रिहाई के लिए नक्सलियों के साथ मध्यस्थता करने का अनुरोध किया है। राज्य सरकार राव और हरगोपाल के यहां पहुंचने की प्रतीक्षा में है।

गृह सचिव यू.एन. बेहरा ने आईएएनएस को बताया, "उनके यहां पहुंचने के बाद ही वार्ता अथवा बातचीत शुरू हो सकेगी।" बेहरा ने कथित रूप से कुछ टेलीविजन चैनलों की उस रिपोर्ट से इंकार किया जिसमें उन्होंने बताया कि सरकार ने कुछ कैदियों को रिहा करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा, "अभी तक इस तरह का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।"

इस बीच नई दिल्ली से शनिवार को हैदराबाद पहुंचे हरगोपाल ने अन्य मध्यस्थों सोमेश्वर राव और नक्सलियों से सहानुभूति रखने वाले एवं क्रांतिकारी लेखक वरवर राव से वार्ता की। हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में इन तीनों ने अगवा अधिकारियों कृष्णा और माझी की रिहाई के लिए मध्यस्थता के प्रारूपों पर चर्चा की।

सम्भलपुर विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हो चुके सोमेश्वर राव खराब स्वास्थ्य के चलते भुवनेश्वर की यात्रा नहीं कर सकते इसलिए हरगोपाल अकेले राजधानी पहुंचेंगे। हरगोपाल ने कहा कि नक्सलियों से बातचीत करने के लिए वह जंगल में यात्रा कर सकने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने उड़ीसा सरकार से नक्सली घांती प्रसादम को रिहा करने की सलाह दी है ताकि वह उनका दूत का काम कर सके। प्रसादम इस समय आंध्र प्रदेश की जेल में बंद है। उसे चार महीने पहले उड़ीसा में गिरफ्तार किया गया जिसे बाद में आंध्र प्रदेश भेज दिया गया।

हरगोपाल की प्रसादम को रिहा करने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि सरकार जिन पर गम्भीर आरोप नहीं हैं केवल उनके ऊपर से मामले वापस ले सकती है। गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि नक्सलियों ने कृष्णा और माझी को रिहा करने के लिए जो शर्ते रखीं हैं। उनमें से एक शर्त को मानते हुए उनके खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को गुरुवार से बंद कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि उनकी अन्य मांगों पर सरकार विचार कर रही है। नक्सलियों की अन्य मांगों में सभी राजनीतिक कैदियों की रिहाई, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के साथ समझौतों को रद्द करना और पुलिस हिरासत में मारे गए नक्सलियों से सहानुभूति रखने वाले लोगों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल है।

नक्सलियों ने कृष्णा और माझी की रिहाई के लिए सरकार को पहले 48 घंटे का समय दिया था। उनकी यह समय सीमा शुक्रवार शाम समाप्त हो गई। इस बीच कृष्णा और माझी की रिहाई की मांग को लेकर लोगों ने राज्य के कई हिस्सों में शनिवार को रैलियां निकालीं। विधानसभा में भी बंधक बनाए गए अधिकारियों की सुरक्षित रिहाई की अपील की गई।

राज्य के इस्पात एवं खनन मंत्री रघुनाथ मोहंती ने विधानसभा में में प्रस्ताव पेश किया जिसे सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। प्रस्ताव में कहा गया, "अगवा किए जाने के मसले पर सदन अपनी गहरी चिंता व्यक्त करता है। सदन सर्वसम्मति से मीडिया के माध्यम से दोनों व्यक्तियों की रिहाई की अपील करता है। सदन पीड़ित परिवारों के दुख और पीड़ा पर अपनी सहानुभूति जताता है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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