नही छिनेगी अर्जुन मुंडा से सीएम की कुर्सी, उपचुनाव जीते
आपको बता दें कि अर्जुन मुंडा के लिए ये जीत काफी जरूरी थी क्योंकि संवैधानिक आवश्यक्ताओं के चलते मुंडा को विधान सभा की सदस्यता हासिल करना बेहद अनिवार्य था। क्योंकि नियम के मुताबिक किसी भी मुख्यमंत्री को मुख्यमंत्री बनने के छह महीने के भीतर विधानसभा की सदस्यता हासिल करना अनिवार्य है। पिछले साल सितम्बर में वह राज्य के मुख्यमंत्री बने थे।
मुंडा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और झारखण्ड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक (जेवीएम-पी) के उम्मीदवार कृष्णा गागाराय को 17,000 से अधिक मतों से पराजित किया। गौरतलब है कि इससे पहले मुंडा खरसांवा सीट से वर्ष 1995 में भी झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के टिकट पर विजयी हुए थे, लेकिन वर्ष 2000 में विधानसभा चुनाव से पहले ही वह भाजपा में शामिल हो गए थे। मुंडा इस सीट से वर्ष 2000 और 2005 में भाजपा के टिकट पर विजयी हो चुके हैं। वर्ष 2009 में भाजपा के मंगल सिंह सॉय इस सीट से विजयी हुए थे लेकिन मुंडा के लिए उन्होंने पिछले साल ही इस सीट से इस्तीफा दे दिया था।













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