लीबिया, यमन में झड़पें, बहरीन में पुलिस का धावा

लीबिया, यमन में झड़पें, बहरीन में पुलिस का धावा

लीबिया में कर्नल गद्दाफ़ी 40 साल से सत्ता में हैं

मिस्र और ट्यूनिशिया में प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के बाद लीबिया और यमन सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़पें हुई हैं. उधर बहरीन में तीन दिनों के प्रदर्शनों के बाद पुलिस ने रात में प्रदर्शनकारियों के कैंप पर धावा बोला और उन्हें तितर-बितर कर दिया है.

लगभग 40 साल से लिबिया में सत्ता मे बने हुए कर्नल मोहम्मद गद्दाफ़ी की हुकूमत के ख़िलाफ़ देश के तीसरे सबसे बड़े शहर अल बैदा में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई हैं.

एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अपुष्ट रिपोर्टों से संकेत मिले हैं कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई और चार लोगों की मौत हो गई.

एक अख़बार की वेबसाइट पर जलते हुए एक पुलिस थाने की तस्वीरे दिखाई गई लेकिन जल्द ही इस वेबसाइट को बंद कर दिया गया.

मंगलवार को लीबिया के बेनग़ाज़ी शहर में हिंसक प्रदर्शन हुए थे. प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार को 'डे ऑफ़ रेज' यानी 'रोष दिवस' का आहवान किया है और सोशल नेटवर्किंग साइटों के ज़रिए सरकार विरोधियों के एकजुट करने की कोशिश की है.

यमन की राजधानी साना में कुछ दिनों के प्रदर्शनों और फिर शांति के बाद बुधवार को दोबारा प्रदर्शन हुए और प्रदर्शनकारियों के पुलिस के साथ झड़पें हुई हैं.

प्रदर्शनकारी और अधिकारों और रहन-सहन की बेहतर परिस्थितयों की मांग कर रहे हैं.

बुधवार को साना विश्वविद्यालय में लगभग सौ प्रदर्शनकारी एकत्र हुए और उन्होंने राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह का इस्तीफ़ा माँगते हुए शहर के मुख्य चौराहे की तरफ़ मार्च करने की कोशिश की.

लेकिन वहाँ उनकी राष्ट्रपति के समर्थकों के साथ झड़पें हुईं.

हाल के दिनों में हज़ारों यमनी नागरिकों ने सड़कों पर उतर कर अपने असंतोष का इज़हार किया है.

राष्ट्रपति सालेह लगभग 30 साल से सत्ता में बने हुए हैं लेकिन उन्होंने 2013 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद सत्ता छोड़ने की घोषणा की है.

उधर बहरीन में सुरक्षाकर्मियों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के एक कैंप पर बुधवार रात को धावा बोला, आँसू गैस और रबड़ की गोलियाँ चलाईं और उन्हें तितर-बितर कर दिया. विपक्ष के अनुसार कम से कम चार लाग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं.

पिछले चार दिनों से सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी राजधानी मानामा के मध्य में स्थित चौराहे पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

ब्रितानी शासन से 1971 में आज़ाद हुए बहरीन में शिया मुसलमान बहुमत में हैं लेकिन अल्पसंख्यक सुन्नी समुदाय के सदस्यों का वहाँ शासन है. शियाओं का आरोप है कि उनके साथ भेदभाव होता है और कई क़ानून निष्पक्ष नहीं हैं.

सुरक्षाकर्मियों के धावा बोलने से पहले अमरीका ने बहरीन में प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा पर चिंता जताई और संयम की अपील की थी. बहरीन अमरीका का एक अहम सहयोगी देश है और वहाँ अमरीकी नौसेना का फ़िफ़्थ फ़्लीट - एक विशाल समुद्री बेड़ा वर्षों से तैनात है.

पिछले कुछ दिनों में लीबिया में भी प्रदर्शन हुए हैं और गुरुवार को वहाँ सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने बड़े प्रदर्शनों का आहवान किया है.

उधर ईरान में सोमवार को हुए प्रदर्शनों में एक व्यक्ति की मौत सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच विवाद का मुद्दा बन गई है.

बीबीसी संवाददाता स्टीव जैकसन ने बताया है कि प्रत्यक्षदर्शियों ने राजधानी मानामा के पर्ल चौराहे में रात में सैंकड़ों पुलिसकर्मियों को दाख़िल होते देखा. उस समय प्रदर्शनकारी सोने की तैयारी में थे. उनके अनुसार इससे पहले की प्रदर्शनकारी कुछ कर पाते, पूरा चौराहा आँसू गैस से भर गया और फिर पुलिस ने रबड़ की गोलियाँ चलानी शुरु कर दीं.

धर्मनिरपेक्ष मानी जाने वाली वाड पार्टी के इब्राहीम शरीफ़ ने घटनास्थल से बीबीसी को बताया, "पुलिस ने बिना चेतावनी के कार्रवाई की, चाहे पूरे दिन ये अफ़वाह चल रही थीं कि हमारे पास 24 घंटे का समय है. वहाँ कैंप में सैकड़ों महिलाएँ और बच्चे मौजूद थे. वहाँ लोग तंबुओं में सो रहे हैं और पूरा चौराहा आँसू गैंस से भर गया है. लोग वहाँ पर फँसे हुए, आँसू गैस के बीच में ही सांस लेने पर मजबूर हैं."

उधर बहरीन के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता जनरल तारीक अल हसन ने एक बयान में कहा, "बातचीत का कोई विकल्प न बचने के बाद सुरक्षाकर्मियों ने पर्ल चौराहा खाली करवाया है...वे क़ानून का पालन करने से इनकार कर रहे थे."

बीबीसी संवाददाता इयन पैनल का कहना है कि इस प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि बहरीन का सुन्नी शाही खानदान इन प्रदर्शनों को अपनी सत्ता के लिए ख़तरा मान रही थी.

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