लेस्बियन दंपति का भी बच्चे पर समान अधिकार
न्यूज डॉट को डॉट एयू ने गुरुवार को लिखा है कि 41 वर्षीया महिला ने परिवार कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी चार साल बच्ची के लिए अकेले ही अभिभावकीय जिम्मेदारी लेने की बात कही थी।
उसका तर्क था कि वह कृत्रिम तरीके से गर्भवती हुई थी। किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसे अपना स्पर्म दान दिया था। उसकी पूर्व पार्टनर का नाम बच्ची के जन्म प्रमाण-पत्र पर भी अभिभावक के रूप में दर्ज नहीं है। इसलिए बतौर अभिभावक उसे अकेले ही बच्ची की जिम्मेदारी दी जाए। महिला बच्ची को क्वींसलैंड से न्यू साउथ वेल्स ले जाना चाहती थी।
परिवार न्यायालय के न्यायाधीश पॉल क्रोनिन ने इससे असहमति जताई और कहा कि इस संबंध में महिला की जिम्मेदारी समान रूप से बंटी है। यही नहीं, न्यायाधीश ने अपने फैसले में दूसरी महिला की आठ वर्षीया बेटी को उसकी बहन भी बताया और कहा कि जब तक बच्ची इतनी बड़ी न हो जाए कि वह अपनी गैर-जैविक मां और बहन के साथ अपने रिश्ते को समझ सके, तब तक उसे किसी दूसरे शहर ले जाना उसके हित में नहीं है।
यह मामला तब जाहिर हुआ, जब होमोसेक्सुअल दंपति में अलगाव की नौबत आई और दोनों के अलग-अलग जैविक संबंधों से बच्चे हैं।
अपने फैसले में न्यायाधीश ने कहा कि अब तक का न्यायिक इतिहास विपरीतलिंगी माता-पिता के अलगाव से ही भरा पड़ा है, जहां जैविक संबंध साफ होते हैं, लेकिन इस मामले में समान लिंग की माताओं की कृत्रिम तरीके से पैदा हुई संतान को ध्यान में रखा गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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