मछुआरों की रिहाई के लिए कदम उठाए श्रीलंका : भारत
नई दिल्ली। श्रीलंका द्वारा 136 भारतीय मछुआरों को जाफना में हिरासत में लेने पर भारत ने गुरुवार को अपनी 'गम्भीर चिंता' जताई। भारत ने उनकी रिहाई के लिए श्रीलंका सरकार से 'आवश्यक' कदम उठाने के लिए कहा। साथ ही इस बात पर दुख जताया कि लंका के कुछ मछुआरे कानून अपने हाथ में ले रहे हैं।
विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने अपने श्रीलंकाई समकक्ष जी.एल. पीरिस से फोन पर बात की और उम्मीद जताई कि श्रीलंका सरकार गिरफ्तार भारतीय मछुआरों की रिहाई के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी। कृष्णा ने पत्रकारों को बताया, "मैंने श्रीलंका के विदेश मंत्री जी.एल. पीरिस से टेलीफोन पर बताचीत की है और मैंने उनसे करीब 136 भारतीय मछुआरों को जाफना जिले में हिरासत में लेने पर भारत की गहरी चिंता से अवगत कराया है।"
उन्होंने कहा, "मैंने उनसे अपना गहरा दुख जताते हुए कहा है कि श्रीलंका के नागरिक एवं मछुआरों ने कानून को अपने हाथ में लिया है और भारतीय मछुआरों को बंधक बनाया है।"कृष्णा ने इस बात से सहमत होते हुए कहा कि इस बात का कोई औचित्य नहीं है कि भारतीय मछुआरे श्रीलंका की समुद्री सीमा में भटक जाते हैं। कृष्णा ने कहा कि श्रीलंकाई मछुआरों को भी भारतीय समुद्री सीमा में प्रवेश करते समय 'अत्यधिक सावधानी' बरतने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, "फिर भी भारत और श्रीलंका के द्विपक्षीय सम्बंधों जो हमेशा से हार्दिक रहे हैं, उन्हें देखते हुए मेरा मानना है हम सभी को हालात को दूर करने में मदद करनी चाहिए। मैंने मछुआरों को रिहा करने की सलाह दी है।"रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने एक समारोह से इतर कहा, "हम श्रीलंका सरकार के साथ सम्पर्क में हैं। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि तमिलनाडु के मछुआरों के हितों की सुरक्षा के लिए सरकार हरसंभव प्रयास करेगी। हम काफी बारीकी से मामले पर नजर रख रहे हैं।"
श्रीलंका द्वारा मछुआरों को हिरासत में लेने के विरोध में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने बुधवार को चेन्नई में प्रदर्शन किया। मछुआरों की रिहाई की मांग को लेकर पार्टी के 2000 से अधिक कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारियां दीं।चेन्नई स्थित श्रीलंका उप उच्चायोग के समीप बुधवार को रैली निकालने का प्रयास करने पर डीएमके की सांसद कनिमोझी और टी.के.एस. एलंगोवन को गिरफ्तार किया गया।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को समाचार चैनलों के सम्पादकों के साथ बैठक में कहा कि पड़ोसी देशों के बीच इस तरह के व्यवहार को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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