उड़ीसा सरकार नक्सलियों से वार्ता को तैयार, तलाशी अभियान रोका (राउंडअप)

भुवनेश्वर, 17 फरवरी (आईएएनएस)। उड़ीसा के मलकानगिरी जिले में गुरुवार को नक्सलियों द्वारा अगवा कर लिए गए जिलाधिकारी आर.वीनेल कृष्णा और एक जूनियर इंजीनियर को रिहा कराने के लिए राज्य सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान को रोक दिया है और वार्ता के लिए तैयार हो गई है। इसके साथ ही सरकार ने मध्यस्थता के लिए सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश से संपर्क किया है।

राज्य के गृह सचिव बेहुरा ने संवाददताओं से कहा, "सरकार नक्सलियों के साथ वार्ता करने को तैयार है।" उन्होंने कहा, "राज्य में सभी तलाशी अभियानों को रोकने का निर्देश दे दिया गया है।"

बेहुरा ने कहा कि नक्सलियों के साथ वार्ता गृह विभाग में जिला या राज्य स्तर पर हो सकती है।

उन्होंने कहा, "अपहर्ता हमसे अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से भी वार्ता कर सकते हैं।" बेहुरा ने यह भी कहा कि सरकार ने सभी विकल्प खुले रखे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश द्वारा पिछले दिनों कुछ टेलीविजन चैनलों पर यह प्रस्ताव दिए जाने का हवाला देते हुए कि वह नक्सलियों और सरकार के बीच वार्त में मध्यस्थता करने को तैयार हैं, बेहुरा ने कहा कि सरकार ने उनसे इस संदर्भ में संपर्क किया है और उनसे इस दिशा में कदम बढ़ाने का आग्रह किया है।

ज्ञात हो कि बुधवार शाम को करीब छह नक्सलियों ने मलकानगिरी के जिलाधिकारी आर. वीनेल कृष्णा और उनके साथ मौजूद जूनियर इंजीनियर पवित्र मोहन माझी का चित्रकोंडा इलाके से अपहरण कर लिया था।

नक्सलियों ने आईएएस अधिकारी व जूनियर इंजीनियर को छोड़ने के बदले में सुरक्षा बलों द्वारा नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को रोकने तथा पूर्व में गिरफ्तार अपने साथियों की रिहाई की शर्त रखी है। उन्होंने सरकार को मांग मानने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।

जिलाधिकारी कृष्णा (30) व्यावहारिक अधिकारियों में गिने जाते हैं। वह बुधवार सुबह बाड़ापदा गांव में बैठक के बाद बिना सुरक्षा इंतजाम के विकास परियोजनाओं का निरीक्षण करने जा रहे थे, उसी दौरान छह सशस्त्र नक्सलियों ने उनको एवं उनके सहयोगी को अगवा कर लिया।

अतिरिक्त जिलाधिकारी एस.एल. सेयल के मुताबिक तुरंत लगभग 50 नक्सलियों के समूह ने जिलाधिकारी और जूनियर इंजीनियर पवित्र माहन माझी को घेर लिया। इनमें से छह उन दोनों को कहीं ले गए।

पुलिस ने बताया कि खबर मिली है कि जिलाधिकरी कृष्णा (आंध्र प्रदेश कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी) से उनकी रिहाई की शर्ते लिखवाने के बाद नक्सलियों ने दो अन्य कनिष्ठ अधिकारियों को मुक्त कर दिया।

हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने गुरुवार को सुरक्षा बलों को तलाशी अभियान रोक देने को कहा।

पुलिस के एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, "हम अब कोई अभियान नहीं चला रहे हैं। पूरे राज्य में अभियान को स्थगित कर दिया गया है।"

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली में कहा कि सीमित इलाकों में अस्थायी तौर पर नक्सल विरोधी अभियान रोकने का निर्णय राज्य सरकार को लेना है।

केंद्रीय गृह सचिव जी.के. पिल्लै ने एक कार्यक्रम के इतर संवाददाताओं से कहा, "राज्य सरकार सीमित इलाके में अभियान को रोकने का निर्णय लेने में पूरी तरह सक्षम है।"

कृष्णा के अपहरण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पिल्लै ने कहा, "छत्तीसगढ़ में ऐसा होता रहा है। कुछ दिनों पहले अगवा पुलिसकर्मियों की रिहाई न होने पर 48 घंटे के लिए अभियान को रोक दिया गया था।"

नक्सलियों ने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया और कहा कि यदि सरकार अगवा किए गए अधिकारियों को मुक्त देखना चाहती है तो वह तलाशी अभियान रोक दे और पूर्व में गिरफ्तार किए गए नक्सलियों को रिहा कर दे।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "हम नक्सलियों से बातचीत करने के सभी प्रयास कर रहे हैं और उस स्थान का पता लगा रहे हैं, जहां अपहृत अधिकारियों को रखा गया है।"

राज्य में पहली बार नक्सलियों ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के किसी अधिकारी का अपहरण किया है।

गौरतलब है कि उड़ीसा के 30 जिलों के आधे से अधिक हिस्से में नक्सली सक्रिय हैं। यहां से 616 किलोमीटर दूर मलकानगिरी नक्सलियों का गढ़ माना जाता है।

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने दोनों अधिकारियों की तुरंत रिहाई की मांग की है।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, "हम हालत पर नजर रख रहे हैं। मैंने मलकानगिरी के युवा जिलाधिकारी की रिहाई की अपील की है जो कि गरीब और जनजातीय लोगों के हित के लिए मुश्किल भरे काम करने के लिए जाने जाते हैं।" मलकानगिरी में कृष्णा की नियुक्ति 16 महीने पहले की गई थी।

राज्य के मुख्य सचिव बी. के. पटनायक ने पत्रकारों से कहा, "हम उनकी शर्तो की जांच कर रहे हैं। उन्होंने सुरक्षा बलों को अभियान रोकने और नक्सलियों की रिहाई की मांग की है।"

अपहरण की इस घटना की गूंज विधानसभा में भी सुनाई दी। विपक्षी दलों ने गुरुवार को प्रश्नकाल के स्थगन की मांग की।

विपक्ष के नेता भूपिंद्र सिंह ने कहा, "लोगों को नहीं लगता कि जिले में प्रदेश सरकार की उपस्थिति है। जिलाधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं। यह गंभीर मामला है और हम नहीं जानते कि सरकार क्या कदम उठाने जा रही है।"

बुधवार की रात तक जिलाधिकारी कृष्णा के मुख्यालय वापस नहीं पहुंचने पर पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने उनकी तलाश शुरू कर दी थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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