एस बैंड करार रद्द, विपक्ष ने कहा देरी से उठाया गया कदम
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान विपक्ष के विरोध से बचने के लिए सरकार ने निजी कम्पनी देवास के साथ हुए विवादास्पद एस बैंड करार को जहां गुरुवार को रद्द कर दिया वहीं विपक्ष और लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने सरकार के इस कदम को 'बहुत देरी से उठाया गया कदम' करार दिया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व अध्यक्ष जोशी ने कहा कि 'यदि पीएसी को जांच करने की आवश्यकता महसूस हुई तो वह इस मामले को देखेगी।'जोशी ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की व्यावसायिक इकाई एंट्रिक्स और निजी कम्पनी देवास के बीच 'करार को अंतिम रूप देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।"
उन्होंने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की प्रारम्भिक निष्कर्षो की मीडिया में आई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में बताया गया है कि इस करार से देश के राजकोष को दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा है।करार को सरकार द्वारा रद्द किए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने कहा कि करार इसरो की व्यावसायिक इकाई एंट्रिक्स की एक 'भूल' थी 'जिसे सरकार ने गुरुवार को सुधार लिया।'
सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) के निर्णय की घोषणा करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने पत्रकारों को बताया, "इसरो की व्यावसायिक इकाई एंट्रिक्स के एस बैंड वाले उपग्रह में आरबिट स्लॉट के आवंटन पर देवास मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुआ करार तत्काल प्रभाव से रद्द समझा जाएगा।"
सीसीएस की इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने की।मोइली ने कहा कि निर्णय यह देखने के बाद लिया गया कि "स्पेक्ट्रम आवंटन से सम्बंधित सरकार की नीतियों में पिछले कुछ वर्षो में बदलाव हुए हैं।"उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय आवश्यकताओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन की मांग बढ़ी हैं। रक्षा, अर्धसैनिक बलों, रेलवे, सामाजिक सेवाओं और अन्य जन उपयोगी सेवाओं में एस बैंड की आवश्यकता महसूस की जा रही है।"
उन्होंने कहा, "देश की सामरिक जरूरतों को देखते हुए सरकार एंट्रिक्स को व्यावसायिक उपयोग के लिए एस बैंड में आरबिट स्लाट देने में असमर्थ है। इसके साथ ही इस निर्णय में एस बैंड को लेकर वर्तमान अनुबंधात्मक दायित्व भी शामिल हैं।"इन रिपोर्टों के बाद उठे विवाद को देखते हुए सरकार ने एंट्रिक्स और देवास के बीच हुए करार को रद्द किया है। बिना नीलामी प्रक्रिया अपनाए वर्ष 2005 में दोनों के बीच इस करार को अंतिम रूप दिया गया। पिछले कुछ दिनों से प्रधानमंत्री के अधीन अंतरिक्ष विभाग और सरकार इस करार की समीक्षा कर रहे थे।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को पत्रकारों से कहा था कि यह करार क्रियाशील नहीं है और यदि इसे रद्द करने में देरी हुई है तो वह 'केवल प्रक्रियागत' है।देवास मल्टीमीडिया ने करार रद्द करने के फैसले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। देवास ने बुधवार को सरकार के इस फैसले को 'एकतरफा' बताते हुए इसे 'परेशान करने वाला और अनुचित' करार दिया।
देवास की इस चेतावनी पर मोइली ने कहा कि सरकार कानूनी लड़ाई के लिए तैयार है। मोइली ने कहा, "सीसीएस की बैठक में कानूनी लड़ाई के पहलुओं पर भी चर्चा हुई।"मुरली मनोहर जोशी ने संकेत दिया कि संसदीय समिति इस मामले की जांच कर सकती है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि अभी यह मामला पीएसी के समक्ष नहीं आया है।
उन्होंने कहा, "सरकार ने जो कदम उठाया है उसे बहुत देरी से उठाया गया बहुत मामूली कदम कहा जाता है। मात्र करार रद्द करना काफी नहीं है। इस मामले की गम्भीरता से जांच भी होनी चाहिए।"मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पोलितब्यूरो के सदस्य एस. रामाचंद्रन पिल्लै ने कहा कि समझौते को रद्द किए जाने से विवादास्पद करार पर और सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस बात की सफाई देनी चाहिए कि करार को रद्द करने में इतनी देरी क्यों हुई।
फारवर्ड ब्लॉक के राष्ट्रीय सचिव जी. देवराजन ने कहा कि प्रधानमंत्रई मनमोहन सिंह को अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए क्योंकि अंतरिक्ष विभाग उनके अधीन है।भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने आईएएनएस को बताया कि मनमोहन सिंह विभाग के प्रभारी होने के नाते 'एस बैंड करार में हुईं अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार हैं।'करार के रद्द होने के बावजूद राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा है कि संसद के बजट सत्र के दौरान यह मुद्दा संसद में गरमाएगा।












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