इसरो और देवास के बीच करार एक भूल थी : एंटनी
नई दिल्ली, 17 फरवरी (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने गुरुवार को कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की व्यावसायिक इकाई एंट्रिक्स और निजी कम्पनी देवास के बीच हुआ विवादास्पद स्पेक्ट्रम करार एक 'भूल' थी जिसे सरकार ने सुधार लिया है।
एंट्रिक्स और निजी कम्पनी देवास के बीच एस बैंड स्पेक्ट्रम के आवंटन पर हुए करार को सरकार द्वारा रद्द किए जाने के तुरंत बाद एंटनी ने पत्रकारों को बताया, "इसरो ने भूल की जिसे सरकार ने सुधार लिया है।" एंटनी ने कहा कि करार के लिए रक्षा मंत्रालय से सलाह नहीं ली गई थी।
रक्षा मंत्री ने कहा, "एस बैंड पर करार के लिए रक्षा मंत्रालय से सलाह नहीं ली गई। एस बैंड प्रमुख रूप से सेना, नौसेना और वायुसेना के इस्तेमाल के लिए है। यह हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सम्पत्ति है।"
उन्होंने कहा कि एस बैंड रेडियो तरंगों की उपलब्धता 'सीमित है और इसका आवंटन मुख्य रूप से सामरिक पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जाता है।'
एंटनी ने कहा, "सामरिक पहलुओं को प्राथमिकता सबसे पहले है। एंट्रिक्स और देवास के बीच करार दुर्भाग्यपूर्ण है।"
उल्लेखनीय है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मीडिया की रिपोटरें में पिछले दिनों कहा गया कि एक हजार करोड़ रुपये में एस बैंड स्पेक्ट्रम का 70 मेगाहट्र्ज एक निजी कम्पनी को देने वाले करार से देश के राजस्व को दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसके बाद से विवाद उठ खड़ा हुआ।
बिना निलामी प्रक्रिया अपनाए वर्ष 2005 में एंट्रिक्स और देवास के बीच करार को अंतिम रूप दिया गया। सरकार ने गुरुवार को इस करार को रद्द कर दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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