उड़ीसा में नक्सलियों के खिलाफ अभियान थमा (लीड-4)
पुलिस के एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, "हम कोई अभियान नहीं चला रहे हैं। पूरे राज्य में अभियान को स्थगित कर दिया गया है।"
पुलिस के मुताबिक बुधवार शाम को करीब छह नक्सलियों ने मलकानगिरी के जिलाधिकारी आर. वीनेल कृष्णा और उनके साथ मौजूद जूनियर इंजीनियर पवित्र मोहन माझी का चित्रकोंडा इलाके से अपहरण कर लिया था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली में कहा कि सीमित इलाकों में अस्थायी तौर पर नक्सल विरोधी अभियान रोकने का निर्णय राज्य सरकार को लेना है।
केंद्रीय गृह सचिव जी.के. पिल्लै ने एक कार्यक्रम के इतर संवाददाताओं से कहा, "राज्य सरकार सीमित इलाके में अभियान को रोकने का निर्णय लेने में पूरी तरह सक्षम है।"
कृष्णा के अपहरण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पिल्लै ने कहा, "छत्तीसगढ़ में ऐसा होता रहा है। कुछ दिनों पहले अगवा पुलिसकर्मियों की रिहाई न होने पर 48 घंटे के लिए अभियान को रोक दिया गया था।"
ज्ञात हो कि नक्सलियों ने आईएएस अधिकारी व जूनियर इंजीनियर को छोड़ने के बदले में सुरक्षा बलों द्वारा नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को रोकने की शर्त रखी है।
नक्सलियों ने सरकार को मांग मानने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। नक्सलियों का कहना है कि यदि सरकार अगवा किए गए अधिकारियों को मुक्त देखना चाहती है तो वह तलाशी अभियान रोक दे और पूर्व में गिरफ्तार किए गए नक्सलियों को रिहा कर दे।
पुलिस अधिकारी ने कहा, "हम नक्सलियों से बातचीत करने के सभी प्रयास कर रहे हैं और उस स्थान का पता लगा रहे हैं, जहां अपहृत अधिकारियों को रखा गया है।"
राज्य में पहली बार नक्सलियों ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के किसी अधिकारी का अपहरण किया है।
गौरतलब है कि उड़ीसा के 30 जिलों के आधे से अधिक हिस्से में नक्सली सक्रिय हैं। यहां से 616 किलोमीटर दूर मलकानगिरी नक्सलियों का गढ़ माना जाता है।
मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने दोनों अधिकारियों की तुरंत रिहाई की मांग की है।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, "हम हालत पर नजर रख रहे हैं। मैंने मलकानगिरी के युवा जिलाधिकारी की रिहाई की अपील की है जो कि गरीब और जनजातीय लोगों के हित के लिए मुश्किल भरे काम करने के लिए जाने जाते हैं।" मलकानगिरी में कृष्णा की नियुक्ति 16 महीने पहले की गई थी।
राज्य के मुख्य सचिव बी. के. पटनायक ने पत्रकारों से कहा, "हम उनकी शर्तो की जांच कर रहे हैं। उन्होंने सुरक्षा बलों को अभियान रोकने और नक्सलियों की रिहाई की मांग की है।"
अपहरण की इस घटना की गूंज विधानसभा में भी सुनाई दी। विपक्षी दलों ने गुरुवार को प्रश्नकाल के स्थगन की मांग की।
विपक्ष के नेता भूपिंद्र सिंह ने कहा, "लोगों को नहीं लगता कि जिले में प्रदेश सरकार की उपस्थिति है। जिलाधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं। यह गंभीर मामला है और हम नहीं जानते कि सरकार क्या कदम उठाने जा रही है।"
बुधवार की रात तक जिलाधिकारी कृष्णा के मुख्यालय वापस नहीं पहुंचने पर पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने उनकी तलाश शुरू कर दी थी।
उल्लेखनीय है कि कृष्णा कुछ अन्य अधिकारियों के साथ बुधवार सुबह चित्रकोंडा इलाके में जनसम्पर्क बैठकों में हिस्सा लेने के लिए रवाना हुए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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