आंध्र विधानसभा में जयप्रकाश नारायण के साथ धक्का-मुक्की
जयप्रकाश ने पत्रकारों से विपक्षियों द्वारा विधानसभा और विधान परिषद के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल के भाषण को बाधित करने की आलोचना की थी, जिसके तुरंत बाद उनके साथ धक्का-मुक्की की गई।
जयप्रकाश ने टीआरएस और तेलंगाना समर्थक विधायकों के व्यवहार की निंदा की थी और अभिभाषण को बाधित करने को संविधान का उल्लंघन बताया था। उन्होंने कहा था कि यदि ऐसा जारी रहा, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाना चाहिए।
इसके तुरंत बाद टीआरएस विधायकों ने उनके साथ बहस शुरू कर दी और 'जय तेलंगाना' के नारे लगाए। इस बीच पुलिस द्वारा सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने के बावजूद एक विधायक ने जयप्रकाश के सिर पर वार भी कर दिया।
जयप्रकाश ने विधानसभा उपाध्यक्ष से इसकी शिकायत की है। जयप्रकाश आंध्र प्रदेश के विभाजन के विरोध में हैं।
इस घटना पर दुख जताते हुए लोकसत्ता प्रमुख ने कहा कि वह विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे। कांग्रेसी विधायकों ने उनसे ऐसा न करने का अनुरोध किया है।
जयप्रकाश ने 1990 के दशक में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से इस्तीफा देकर लोकसत्ता का गठन किया था। इसके जरिए वे लोकतांत्रिक सुधार के लिए आंदोलन चलाना चाहते थे। लोकसत्ता को उन्होंने 2009 के चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टी बना दिया और विधानसभा चुनाव में हैदराबाद के कुकटपल्ली विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने जीत हासिल की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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