एस बैंड पर इसरो और देवास के बीच करार रद्द (लीड-1)
नई दिल्ली, 17 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने गुरुवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की व्यावसायिक इकाई एंट्रिक्स और निजी कम्पनी देवास के बीच एस बैंड के इस्तेमाल के लिए अंतरिक्ष स्पेक्ट्रम के आवंटन पर हुए विवादास्पद करार को रद्द कर दिया।
सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) के निर्णय की घोषणा करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने पत्रकारों को बताया, "इसरो की व्यावसायिक इकाई एंट्रिक्स के एस बैंड वाले उपग्रह में आरबिट स्लॉट के आवंटन पर देवास मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुआ करार तत्काल प्रभाव से रद्द समझा जाएगा।"
सीसीएस की इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने की।
मोइली ने कहा कि निर्णय यह देखने के बाद लिया गया कि "स्पेक्ट्रम आवंटन से सम्बंधित सरकार की नीतियों में पिछले कुछ वर्षो में बदलाव हुए हैं।"
उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय आवश्यकताओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन की मांग बढ़ी हैं। रक्षा, अर्धसैनिक बलों, रेलवे, सामाजिक सेवाओं और अन्य जन उपयोगी सेवाओं में एस बैंड की आवश्यकता महसूस की जा रही है।"
उन्होंने कहा, "देश की सामरिक जरूरतों को देखते हुए सरकार एंट्रिक्स को व्यावसायिक उपयोग के लिए एस बैंड में आरबिट स्लाट देने में असमर्थ है। इसके साथ ही इस निर्णय में एस बैंड को लेकर वर्तमान अनुबंधात्मक दायित्व भी शामिल हैं।"
उल्लेखनीय है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मीडिया की रिपोटरें में पिछले दिनों कहा गया कि एक हजार करोड़ रुपये में एस बैंड स्पेक्ट्रम का 70 मेगाहट्र्ज एक निजी कम्पनी को देने वाले करार से देश के राजस्व को दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
इन रिपोर्टों के बाद उठे विवाद को देखते हुए सरकार ने एंट्रिक्स और देवास के बीच हुए करार को रद्द किया है। बिना नीलामी प्रक्रिया अपनाए वर्ष 2005 में दोनों के बीच इस करार को अंतिम रूप दिया गया। पिछले कुछ दिनों से प्रधानमंत्री के अधीन अंतरिक्ष विभाग और सरकार इस करार की समीक्षा कर रहे थे।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को पत्रकारों से कहा था कि यह करार क्रियाशील नहीं है और यदि इसे रद्द करने में देरी हुई है तो वह 'केवल प्रक्रियागत' है।
देवास मल्टीमीडिया ने करार रद्द करने के फैसले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। देवास ने बुधवार को सरकार के इस फैसले को 'एकतरफा' बताते हुए इसे 'परेशान करने वाला और अनुचित' करार दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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