अभिभाषण के दौरान राज्यपाल से तेलंगाना के विधायकों का दुर्व्यवहार (लीड-1)
तेलंगाना विधायकों द्वारा राज्यपाल के अभिभाषण के अवसर पर जमकर हंगामा करने की वजह से राज्यपाल को बीच में भी अपना अभिभाषण छोड़ना पड़ा।
राज्यपाल ई. एस. एल. नरसिम्हन ने गुरुवार को जैसे ही दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को सम्बोधित करना आरम्भ किया वैसे ही तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस), तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के तेलंगाना क्षेत्र के विधायकों ने हंगामा आरम्भ कर दिया।
विधायकों ने अभिभाषण में तेलंगाना का जिक्र कम होने की वजह से हंगामा करने लगे और पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के लिए विधानसभा में प्रस्ताव लाने की मांग की।
हंगामा कर रहे विधायकों ने राज्यपाल के हाथों से अभिभाषण की प्रति छीनने की कोशिश की। उन्होंने 'राज्यपाल वापस जाओ' के नारे भी लगाए। कुछ विधायकों ने तो अभिभाषण की प्रतियां फाड़कर हवा में उछाल दी।
ये विधायक नारेबाजी करते हुए आसन के करीब आ गए । उसके बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
टीआरएस, तेदेपा और तेलंगाना समर्थक अन्य विधायकों ने राज्यपाल पर तेलंगाना विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना विरोधी होने की वजह से उन्हें तेलंगाना की भूमि पर विधानसभा को सम्बोधित करने का अधिकार नहीं है।
विधायकों के विरोध को देखते हुए राज्यपाल ने महज 15 मिनटों में अपना अभिभाषण समाप्त कर दिया। राज्यपाल का अभिभाषण 40 पृष्ठों का था लेकिन वह अभिभाषण के कुछ ही पृष्ठ पढ़ पाए। इस दौरान सदन में मौजूद मार्शलों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के तेलंगाना क्षेत्र के विधायक सदन में मौजूद नहीं थे। संसद में तेलंगाना प्रस्ताव लाने की मांग को लेकर पिछले कुछ दिनों से वे दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।
तेदेपा के नेता एन. जर्नादन रेड्डी ने कहा कि उनकी पार्टी शुक्रवार को अपने रुख पर कायम रहेगी। उन्होंने कहा, "हम अपना विरोध तब तक जारी रखेंगे जब तक इस मुद्दे को लेकर संसद में विधेयक नहीं लाया जाता और विधानसभा में अलग तेलंगाना राज्य के लिए प्रस्ताव नहीं पारित किया जाता।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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