ईरान, लीबिया और यमन में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन (राउंडअप)
ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने विरोध प्रदर्शन कराने वालों को देश का दुश्मन करार दिया है।
सरकारी सूत्रों ने अब तक दो प्रदर्शनकारियों की मौत की पुष्टि की है। इनमें 26 साल का युवक साना जालेह व 22 वर्षीय युवक मोहम्मद मोख्तारी शामिल हैं। दोनों के एक प्रतिबंधित संगठन 'पीपुल्स मुजाहिद्दीन ऑफ ईरान' के सदस्यों द्वारा मारे जाने की बात कही गई है।
वैसे इस संगठन ने मंगलवार को इन आरोपों से इंकार किया था। उसका कहना था कि सरकारी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को दबाने की कोशिश की, उन पर गोलियां चलाईं और आंसू गैस के गोले छोड़े।
मिस्र और ट्यूनीशिया में हुए विरोध प्रदर्शन के समर्थन में विपक्ष के नेता मीर-हुसैन मौसावी और मेहदी करौबी ने सोमवार को विरोध-प्रदर्शनों का आह्वान किया था। मौसावी और करौबी दोनों नजरबंद हैं और वे विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा नहीं ले सके। संसद के स्पीकर अली लारिजानी ने इन विरोध प्रदर्शनों के लिए अमेरिका को दोषी ठहराया है।
राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद का कहना है कि तेहरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की योजना बनाने वाले दुश्मन अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर सकेंगे।
अहमदीनेजाद ने मंगलवार को एक टेलीविजन साक्षात्कार में कहा कि ईरान प्रगति के शिखर को छूना चाहता है और दुनिया के साथ अपने रिश्तों में बदलाव चाहता है, इसलिए उसके दुश्मन हैं। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों की योजना बनाने वाले अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर सकेंगे।
यमन में बुधवार को सरकार के खिलाफ हुए प्रदर्शन में एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई जबकि 17 अन्य लोग घायल हुए।
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक अदन के दक्षिणी शहर और राजधानी सना में हिंसक प्रदर्शन हुए। अदन में पुलिस के साथ हुई झड़पों में एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई। अदन के समीप मनसौरा में हुए प्रदर्शन में चार अन्य प्रदर्शनकारियों के घायल होने की सूचना है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने अल मनसौरा में निगम भवन के बाहर चार कारों में आग लगा दी इसके पाद पुलिस ने उन पर गोलियां चलाईं।
जबकि सना में राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह और उनके समर्थकों के बीच हुई झड़पों में 13 लोग घायल हुए।
लीबिया के बेनगाजी शहर में रात भर हुए प्रदर्शनों में कम से कम 38 लोग घायल हुए।
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़पें हुईं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया उसके बाद उनकी छुट्टी कर दी गई।
प्रदर्शनकारी 41 वर्षो से सत्ता पर काबिज गद्दाफी के शासन के अंत की मांग कर रहे हैं। गद्दाफी के खिलाफ गुरुवार को होने वाले प्रदर्शन को उन्होंने 'डे ऑफ एंगर' नाम दिया है।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "शहर की गलियों में तनाव है। ट्यूनीशिया और मिस्र में जो कुछ हुआ है वही लीबिया में भी दोहराया जाएगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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