अब लीबिया में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन (लीड-1)
बीबीसी के मुताबिक वकील को बाद में रिहा कर दिया गया, लेकिन विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
ये विरोध प्रदर्शन अधिवक्ता फाथी तेरबिल की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुए। तेरबिल, 1996 में त्रिपोली के अबू सलीम जेल में सुरक्षा बलों द्वारा कथित रूप से मारे गए कैदियों के परिजनों के वकील हैं।
बीबीसी ने कहा कि तेरबिल को इसलिए गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि उन्होंने वर्तमान कैदियों के रिश्तेदारों से कहा था कि जेल में भारी दुर्व्यवस्था है, लिहाजा वे विरोध करें। पूरे लीबिया में गुरुवार को विरोध प्रदर्शन के लिए इंटरनेट पर आह्वान किया गया।
बेनगाजी में विरोध प्रदर्शन की पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के एक आयोजन में कोई 2,000 लोग जमा हुए थे।
लोगों ने पुलिस पर पथराव किया, जवाब में पानी की बौछारें, आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियां दागी गईं।
एक स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इस घटना में 10 पुलिस अधिकारियों सहित 14 लोग घायल हुए।
बाद में सरकारी टेलीविजन पर बेनगाजी में सरकार के पक्ष में नारे लगाते हुए सैकड़ों लोगों को दिखाया गया।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बीबीसी को बताया, "भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने सरकार विरोधी नारेबाजी शुरू की और फिर पूरी भीड़ नारेबाजी में शामिल हो गई। लेकिन उसके बाद सरकार समर्थक और विरोधियों में झड़प हो गई और उसके बाद सरकार समर्थक वहां से तितर-बितर हो गए। सुरक्षाकर्मियों ने वहां पहुंच कर गरम पानी की बौछारों के जरिए भीड़ को तितर-बितर कर दिया।"
ज्ञात हो कि इन दिनों मध्य पूर्व में बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और तानाशाह नेतृत्व को लेकर पैदा हुए असंतोष के कारण विरोध प्रदर्शनों की लहर चल पड़ी है।
लोगों के विरोध के चलते ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति जिन अल आबदीन बेन अली को जनवरी में सत्ता छोड़कर भागना पड़ा जबकि मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को गत 11 फरवरी को अपने पद से इस्तीफा देने के लिए बाध्य होना पड़ा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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