धूमकेतु की 72 तस्वीरें खोल पाएगीं जीवन का रहस्य (फोटो सहित)
धूमकेतु के बारे में और जानकारी जुटाने के क्रम में नासा के अंतरिक्षयान न्यू एक्सप्लोरेसन ऑफ टेंपल1 (नेक्स्ट) को मंगलवार को धूमकेतु (9पी/टैंपल1) के नजदीक से होकर गुजारा गया। इस दौरान नेक्स्ट ने धूमकेतु की 72 तस्वीरें लीं। इन तस्वीरों को नासा द्वारा शीघ्र ही सार्वजनिक किया जाएगा।
नासा से मिली जानकारी के अनुसार धूमकेतु के नाभिक की शक्ल आलू या अनियमित आकार के पत्थर जैसी है। यह सूर्य का चक्कर 5.52 वर्ष में लगाता है। यह नाभिक अपने अक्ष पर 40.7 घंटे में एक बार घूमता है।
पूर्व योजना के अनुसार नेक्स्ट को 200 किलोमीटर की दूरी से गुजरना था लेकिन यह यान वास्तव में धूमकेतु के नाभिक से 181 किमी की दूरी से नियत समय पर गुजरा। वैज्ञानिक इसे अपने आप में बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार इसका नेक्ट द्वारा धूमकेतु का साक्षात्कार ऐतिहासिक है, क्योंकि इस अंतरिक्षयान ने दो धूमकेतु के साथ साक्षात्कार किया। ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी एक धूमकेतु का दो अंतरिक्षयानों ने साक्षात्कार किया हो। इन तस्वीरों और उपलब्ध आंकड़ों पर वैज्ञानिक अध्ययन करने के बाद ही कुछ बता पाएंगे।
ज्ञात हो कि वर्ष 1984 से कई धूमकेतु से ऐसे छह साक्षात्कार हो चुके हैं। धूमकेतु का अध्ययन इसलिए भी अहम माना जा रहा है कि यह इस मूलभूत प्रश्न का उत्तर ढूंढने में सहायक होंगे कि आज से 3.9 अरब वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जीवन का आविर्भाव किस तरह हुआ होगा।
भारतीय तारा भौतिकी संस्थान के पूर्व खगोल वैज्ञानिक और धूमकेतु पर शोध कर रहे प्रो. आर.सी. कपूर ने आईएएनएस को बताया कि नासा का स्टारडर्स मिशन 1999 में लांच किया गया था। यह जनवरी 2004 को धूमकेतु 81पी/वाइल्ड 2 नामक धूमकेतु से लगभग 240 किलोमीटर की दूरी से गुजरा और इसके डस्ट कलक्टर (धूल संग्राहक यंत्र) ने इस धूमकेतु की गैस और धूल के नमूने इकट्ठे किए जो पृथ्वी पर 15 जनवरी 2006 को पहुंचे।
उन्होंने बताया कि जुलाई 2007 में इस मिशन का नाम बदल कर 'नेक्स्ट' रखा गया। अब इस अंतरिक्षयान को कामेट 9पी/टेंपल1 के पास से गुजारा गया। उन्होंने बताया कि मंगलवार सुबह भारतीय समयानुसार 10 बजकर 7 मिनट पर यह अंतरिक्षयान धूमकेतु के पास से गुजरा। जिसकी धूमकेतु के नाभिक से न्यूनतम दूरी 181 किलोमीटर थी। इसके बाद यह अंतरिक्षयान अपने पथ में आगे बढ़ गया।
कपूर ने बताया कि अंतरिक्षयान की गति 11 किलोमीटर प्रति सेकंड थी और अंतरिक्ष में जब यह साक्षात्कार हुआ तो यह पृथ्वी से 34.1 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर था।
उन्होंने बताया कि नासा के वैज्ञानिकों से मिली जानकारी के अनुसार अंतरिक्षयान के नैविगेशन कैमरा ने इस साक्षात्कार से 60 दिन पूर्व से ही चित्र लेने शुरू कर दिए थे और मंगलवार सुबह साढ़े ग्यारह बजे अंतरिक्षयान के हाईमेन एंटीना पृथ्वी की ओर मुड़े और पूर्व योजना के तहत इस धूमकेतु के नाभिक की 72 तस्वीरें ली गईं। इनमें से प्रत्येक तस्वीर को पृथ्वी पर पहुंचने में 15 मिनट लग गए। इन तस्वीरों को नासा द्वारा शीघ्र ही सार्वजनिक किया जाएगा।
प्रो. कपूर ने बताया कि इस ऐतिहासिक घटना का नासा टीवी की ओर से सीधा प्रसारण भी किया गया। उन्होंने बताया कि नासा से मिली जानकारी के अनुसार धूमकेतु के नाभिक की शक्ल आलू या अनियमित आकार के पत्थर जैसी है। इसका वास्तविक आकार 7.6 किलोमीटर लंबा और 4.9 किलोमीटर चौड़ा है। यह सूर्य का चक्कर 5.52 वर्ष में लगाता है। यह नाभिक अपने अक्ष पर 40.7 घंटे में एक बार घूमता है।
उन्होंने बताया कि नासा के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि नेक्स्ट ने जो तस्वीरें ली हैं, उनसे इंपेक्टर द्वारा 4 जुलाई 2005 को धूमकेतु पर बनाए गए क्रेटर (गड्ढे) की स्थिति स्पष्ट नजर आएगी। वैज्ञानिकों की यह जानने की उत्सुकता है कि पिछले पांच वर्ष में इस नाभिक में इसकी सतह पर क्या-क्या बदलाव आए हैं।
कपूर ने बताया कि वैज्ञानिक धूमकेतु की तस्वीरें और उपलब्ध आंकड़ों का अध्ययन करेंगे और इसके बाद धूमकेतु की रचना और उसकी सतह पर विभिन्न संरचनाओं पर प्रकाश डालेंगे।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1984 से धूमकेतु के ऐसे छह साक्षात्कार हो चुके हैं। धूमकेतु का अध्ययन अब सिर्फ दूरबीनों के सहारे नहीं होता। अंतरिक्षयान इस प्रकार के साक्षात्कार सौर मंडल के इतिहास पर प्रकाश डालते हैं और इस मूलभूत प्रश्न का उत्तर ढूंढ़ने में मदद करते हैं कि आज से 3.9 अरब वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जीवन का आविर्भाव किस तरह हुआ होगा।
प्रो. कपूर ने बताया कि पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति का रहस्य आज भी बरकार है। जीवन की उत्पत्ति में सहायक यौगिक अमोनिया, मिथेन, कार्बन डाईऑक्साइड व पानी लगभग सभी धूमकेतु में पाया जाता है। इसको देखते हुए वैज्ञानिक धूमकेतु पर लगातार शोध कर रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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