टाटा के पत्र से करुणानिधि को अब इंकार क्यों : जयललिता
जयललिता ने अपने एक बयान में कहा, "रतन टाटा के पत्र को कथित रूप से कार्पोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया ने उन्हें अपने हाथों से सौंपा था। अब इस बात से इंकार करने में करूणानिधि जिस तरह से जल्दबाजी दिखा रहे हैं उससे नए सवाल खड़े होते हैं।"
उन्होंने कहा, "टाटा का पत्र एक प्रमुख राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र के मुख्य पृष्ठ पर प्रकाशित होने और टेलीविजन चैनल द्वारा इसके बारे में रिपोर्ट देने पर करुणानिधि ने इंकार में अपना बयान जारी नहीं किया।"
जयललिता ने आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा, "पत्र के बारे में मीडिया में जब पहली बार रिपोर्ट आई तो करुणानिधि ने इससे क्यों नहीं इंकार किया? पत्र के कथित लेखक रतन टाटा और इसे कथित रूप से मुख्यमंत्री को सौंपने वाली नीरा राडिया ने तभी इसका खंडन क्यों नहीं किया?
गत 13 नवंबर 2007 को लिखे गए पत्र में कथित रूप से पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए. राजा की प्रशंसा की गई थी। राजा इस समय 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में अपनी कथित भूमिका को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की हिरासत में हैं।
टाटा टेलीसर्विसेज के उपाध्यक्ष राजीव नारायन द्वारा मीडिया में दिए गए बयान का हवाला देते हुए जयललिता ने कहा कि नारायन ने टाटा द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र लिखे जाने की बात की पुष्टि की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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