नेपाल में माओवादी नई सरकार में शामिल होने को तैयार
काठमांडू, 16 फरवरी (आईएएनएस)। नेपाल में माओवादी पार्टी, अंतत: नई सरकार में शामिल होने को तैयार हो गई है। माओवादियों ने दो सप्ताह पहले प्रधानमंत्री चुनाव में कम्युनिस्ट नेता झलनाथ खनाल को समर्थन दिया था, लेकिन उसके बाद उन्होंने अपना समर्थन वापस लेने की धमकी दे दी थी।
माओवादियों के प्रमुख पुष्प कमल दहाल प्रचंड ने बुधवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात की और मंत्रालयों के बंटवारे पर उनके साथ चर्चा की। यह अपने आप में इस बात का संकेत था कि उनकी पार्टी नई सरकार में शामिल होगी।
खनाल से मिलने के तत्काल बाद प्रचंड ने राष्ट्रपति राम बरन यादव से मुलाकात की और उन्हें बताया कि इस सप्ताह मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया जाएगा।
माओवादी सूत्रों ने कहा है कि उनकी पार्टी विदेश मंत्रालय सहित 11 मंत्रालय मांग रही है।
माओवादी सांसद एवं पार्टी की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के पूर्व उप प्रमुख बारशा मान पुन अनंत का नाम नए गृह मंत्री के रूप में सामने आया है। यह मंत्रालय खनाल और माओवादियों के बीच विवाद का कारण बना हुआ था।
खनाल की पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल- एकीकृत-मार्क्सवादी-लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल), माओवादियों को गृह मंत्रालय सौंपने का विरोध करती रही है। कम्युनिस्टों का तर्क था कि इससे 10 वर्षो की हिंसा के दौरान माओवादी कार्यकर्ताओं द्वारा अंजाम दिए गए प्रताड़ना, हत्या एवं अन्य आपराधों के लिए उनके खिलाफ दर्ज मामलों को समाप्त करने का रास्ता साफ हो जाएगा।
इस विवाद के कारण प्रधानमंत्री खनाल अभी तक अपनी पूर्ण कैबिनेट गठित नहीं कर पाए हैं।
प्रधानमंत्री निर्वाचित होने के 13 दिनों बाद भी खनाल मात्र चार सदस्यीय मंत्रिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, और सभी मंत्री उनकी अपनी पार्टी से हैं। लेकिन इनमें से मात्र भारत मोहन अधिकारी को ही विभाग (वित्त मंत्रालय) आवंटित किया गया है। अधिकारी उप प्रधानमंत्री भी हैं। बाकी सभी मंत्री माओवादियों के साथ विवाद के कारण अभी तक विभाग विहीन हैं।
गृह मंत्रालय मांगने के साथ ही माओवादी यह भी मांग कर रहे थे कि खनाल उस समझौते का सम्मान करें, जिस पर उन्होंने चुनाव की पूर्व संध्या पर माओवादियों का समर्थन हासिल करने के लिए हस्ताक्षर किया था।
इस विवादास्पद समझौते में यह बात शामिल है कि पीएलए के लगभग 20,000 लड़ाकों को समाहित करने के लिए एक नए सुरक्षा बल का गठन किया जाएगा। जन युद्ध की समाप्ति के पांच साल बाद भी पीएलए को अभी भंग नहीं किया गया है। समझौते के अनुसार कम्युनिस्ट और माओवादी, बारी-बारी से सरकार का नेतृत्व करेंगे।
इन शर्तो को खनाल की पार्टी ने, साथ ही नेपाली कांग्रेस ने खारिज कर दिया था।
पैदा हुए नए संकट के समाधान के लिए खनाल और प्रचंड ने मंगलवार को एक नए समझौते पर हस्ताक्षर किया।
नए करार में कहा गया है कि पीएलए का भविष्य एक विशेष समिति तय करेगी, जो सभी प्रमुख पार्टियों के निर्णय का अनुसरण करेगी। इसमें यह भी शामिल है कि सरकार राष्ट्रीय आम सहमति से चलेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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