धूमकेतु की तस्वीर लेगा 'नेक्स्ट'
भारतीय तारा भौतिकी संस्थान के पूर्व खगोल वैज्ञानिक प्रो. आर.सी. कपूर ने सोमवार को आईएएनएस को बताया कि पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति का रहस्य आज भी बरकार है। उन्होंने बताया कि उत्पत्ति में सहायक यौगिक अमोनिया, मिथेन, कार्बन डाईऑक्साइड व पानी धूमकेतु में पाया जाता है। यही वजह है कि वैज्ञानिक धूमकेतु पर लगातार शोध कर रहे हैं।
धूमकेतु पर 37 वर्षो से अध्ययन कर रहे कपूर ने कहा कि चार जुलाई, 2005 को नासा के डीप इंपैक्ट मिशन के तहत इंपैक्टर को 9पी टेंपल से टकराया गया था, जिससे धूमकेतु पर लगभग 100 मीटर चौड़ा और 30 मीटर गहरा गड्ढा बन गया था। इस मिशन का उद्देश्य धूमकेतु की भीतरी संरचना सहित कई अन्य अनसुलझी गुत्थियों को समझना भी है।
उन्होंने बताया कि अब नेक्स्ट को इसी धूमकेतु के काफी नजदीक पहुंचाया जा रहा है, ताकि पांच वर्ष पूर्व डीप इंपैक्ट द्वारा किए गए क्रेटर (गड्ढे) की स्थिति का पता चल सके।
उन्होंने बताया कि भारतीय समयानुसार मंगलवार सुबह 10 बजकर सात मिनट पर नेक्स्ट इस धूमकेतु की नाभि से होकर 200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गुजरेगा।
कपूर ने बताया कि इसका मकसद डीप इंपेक्ट के बनाए हुए उस गड्ढे का अध्ययन करना भी है जिसको लेकर वैज्ञानिकों में बेहद उत्सुकता है।
उन्होंने बताया कि धूमकेतु में जीवन के लिए आवश्यक मूलभूत यौगिक होते हैं और वैज्ञानिकों का यह मत है कि इनके अध्ययन से पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों का उत्तर मिल सकेगा।
कपूर ने बताया कि धूमकेतु सौरमंडल के सदस्य हैं। इनके पथ दीर्घ वृत्ताकार हैं और जब ये सूर्य के निकट पहुंचने लगते हैं तो इन पर जमी बर्फ पिघलने लगती है और अमोनिया, पानी, कार्बन डाईऑक्साइड, मिथेन आदि गैसें भाप के रूप में निकलने लगती हैं। इसी प्रक्रिया में धूमकेतु की पूंछ बनने लगती है और सूर्य के निकट जाते समय ये पूंछ लाखों किलोमीटर लंबी हो जाती है।
उन्होंने बताया कि धूमकेतु की नाभि में धूलकण भी होते हैं जो सूर्य की रोशनी में चमकते हैं और पुच्छल तारे के रूप में एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करते हैं।
कपूर ने बताया कि नासा के इस मिशन का उद्देश्य धूमकेतु से निकलती गैसों, धूल और नाभि की संरचना का गहराई से अध्ययन करने के लिए तस्वीरें तथा अन्य माप सम्बंधी जानकारी लेना भी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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