मिस्र में संसद भंग, प्रदर्शनकारी तहरीर चौक पर डटे (राउंडअप इंट्रो-1)

काहिरा, 13 फरवरी (आईएएनएस)। मिस्र में राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के इस्तीफे के बाद देश का शासन सम्भाल रही सशस्त्र सेनाओं की उच्च परषिद ने रविवार को संसद के दोनों उच्च एवं निम्न सदनों को भंग कर दिया। परिषद ने घोषणा की है कि वह छह महीने के भीतर देश में नए सिरे से चुनाव कराएगी। परिषद ने संविधान को भी रद्द किया है।

मुबारक के इस्तीफे के दो दिन बाद भी प्रदर्शनकारी असैन्य सरकार की स्थापना की मांग को लेकर काहिरा के तहरीर चौक पर डटे हैं। सेना ने उन्हें वहां से हटाने की कोशिश की तो दोनों पक्षों में झड़प हो गई।

समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक मिस्र की सशस्त्र सेनाओं की उच्च परिषद ने यह घोषणा सरकारी टेलीविजन पर की। परिषद के प्रमुख रक्षा मंत्री हुसैन तांतवी देश के घरेलू मामलों को देखेंगे और विश्व स्तर पर मिस्र का प्रतिनिधित्व करेंगे।

परिषद ने प्रधानमंत्री अहमद शफीक को एक नए मंत्रिमंडल के गठन तक कार्यालय में बने रहने का आदेश दिया है।

ज्ञात हो कि राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक द्वारा शुक्रवार को इस्तीफा दिए जाने के बाद देश की सत्ता परिषद के हाथों में है। परिषद ने कहा है कि जब तक देश में नए चुनाव नहीं हो जाते तब तक वह शासन सम्भालेगी।

परिषद की इस घोषणा में देश में पिछले 30 वर्षो से चल रहे विवादास्पद आपातकाल के बारे में कोई उल्लेख नहीं किया गया। राजनीतिक बंदियों की रिहाई के लिए प्रदर्शनकारी सेना से आपातकाल हटाने के मांग कर रहे हैं।

राष्ट्रपति मुबारक के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री अहमद शफीक ने अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में रविवार सुबह कहा कि मंत्रियों के रिक्त पदों को भरने में वह 'जल्दबाजी में नहीं' हैं।

शफीक ने कहा, "हम इस मुद्दे को जरूरत से ज्यादा तवज्जो नहीं देना चाहते। जब तक नामांकन में पूरा विश्वास हासिल नहीं हो जाता तब तक हम किसी मंत्री की नियुक्ति नहीं करेंगे।"

तहरीर चौक पर रविवार को भी सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी जमे रहे, क्योंकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे तब तक अपनी जगह से नहीं हटेंगे, जब तक उनकी सारी मांगे पूरी नहीं कर दी जातीं। उनकी मांगों में असैन्य सरकार की स्थापना मुख्य रूप से शामिल है।

ज्ञात हो कि तहरीर चौक मुबारक विरोधी प्रदर्शन का केंद्र रहा है। मुबारक पिछले 30 सालों से मिस्र की सत्ता पर काबिज थे। मुबारक ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया और देश की सर्वोच्च सैन्य परिषद को सत्ता सौंप दी।

समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के अनुसार रविवार को मिस्र की सेना के खिलाफ अचानक स्वस्फूर्त विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। सेना तहरीर चौक से गुजरने वाले एक मार्ग को यातायात के लिए खोलने की कोशिश कर रही थी।

सेना ने जब प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कोशिश की तो प्रदर्शनकारियों ने कहा, "सेना मिस्र की आधार है। आपका मकसद हमें दरकिनार करना नहीं, बल्कि हमारी मांगे पूरी करना है। अन्यथा हम वापस विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे।"

अशरफ अहमद नामक एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि सेना उनके शिविरों को भले ही नष्ट कर सकती है, लेकिन वे यहां से नहीं हटेंगे "क्योंकि अभी यहां बहुत कुछ किया जाना बाकी है। सेना ने अभी तक कुछ भी लागू नहीं किया है।"

सेना जब प्रदर्शनकारियों की ओर बढ़ी तो प्रदर्शनकारियों के साथ हल्की झड़प हुई। कुछ प्रदर्शनकारी सोचते हैं कि अभी तक पर्याप्त रूप में कुछ नहीं किया गया है। वे तब तक तहरीर चौक से नहीं हटना चाहते, जब तक कि सेना किसी असैन्य सरकार को सत्ता नहीं सौंप देती।

विरोध प्रदर्शन के आयोजकों ने चेतावनी दी है कि यदि सर्वोच्च सैन्य परिषद सुधार के उनके एजेंडे को स्वीकार नहीं करती तो वे और रैलियां आयोजित करेंगे।

प्रदर्शनकारियों के एक नेता, सफात हेगाजी ने कहा, "यदि सेना हमारी मांगे पूरी नहीं करती, तो हमारा विद्रोह और तेजी के साथ शुरू होगा।"

उधर मुबारक के पतन के बाद रविवार को पहली बार कैबिनेट की बैठक होने जा रही है।

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार रविवार को राजधानी काहिरा में जनजीवन वापस पटरी पर लौट आया। लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी कई मांगों को लेकर लगातार दबाव बनाए हुए हैं। इन मांगों में आपातकाल हटाया जाना, संसद भंग करना और संवैधानिक संशोधन किया जाना शामिल है।

वर्तमान समय में देश की सत्ता पर काबिज सशस्त्र बलों की उच्च परिषद ने वादा किया है कि वह लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई किसी सरकार को सत्ता हस्तांतरित करेगी। परिषद ने यह भी कहा है कि कोई नई सरकार गठित होने तक कैबिनेट अपनी जगह बनी रहेगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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