'मिस्र की क्रांति से इस्लामवादियों को बढ़ावा मिल सकता है'

नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। पश्चिम एशियाई मामलों के विशेषज्ञों ने शनिवार को कहा कि मिस्र में राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के पतन की घटना अन्य देशों में भी इसी तरह की अशांति भड़का सकती है और इससे इस्लामी ताकतों को लाभ मिल सकता है।

एक विशेषज्ञ का मानना है कि अधिनायकवादी शासन से लोकतंत्र में रूपांतरण खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि मुस्लिम ब्रदरहुड के सम्भावित अभ्युदय को लेकर चेतावनियां दी गई हैं। मुस्लिम ब्रदरहुड सबसे संगठित विपक्षी समूह है और देश भर में इसका ठोस नेटवर्क है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पश्चिम एशियाई अध्ययन केंद्र से जुड़े ए.के.महापात्रा ने कहा कि हालांकि फिलहाल मिस्र की सेना का सत्ता पर कब्जा है, जो कि रूढ़िवादी है।

महापात्रा ने कहा, "सैन्य परिषद इस समय सबसे आगे है। पहले यह पीछे थी। यहां सेना, व्यवस्था का अंग है। सेना की निगरानी में ही नए चुनाव होंगे।"

लेकिन महापात्रा ने चेतावनी दी कि मुबारक के बाद का युग अराजक हो सकता है, क्योंकि सत्ताधारी नेशनल डेमाक्रे टिक पार्टी के अलावा बाकी सभी पार्टियों का अस्तित्व लगभग न के बराबर है।

ज्ञात हो कि शुक्रवार को मुबारक के इस्तीफे के साथ ही मिस्र में एक नया इतिहास बना। मुबारक अरब दुनिया के सबसे लम्बे समय तक शासन करने वाले शासकों में रहे हैं। उनके खिलाफ पिछले 18 दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे थे।

महापात्रा ने कहा कि मुस्लिम ब्रदरहुड की सामाजिक संगठनों में उपस्थिति है और जमीनी स्तर पर इसकी ठोस पहुंच है। उन्होंने कहा, "इसका इस्लामीकरण नीचे से है। इसका उद्देश्य समाज का इस्लामीकरण करना और सही समय पर राजनीतिक सत्ता पर काबिज होना है।"

लेकिन अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि मुस्लिम ब्रदरहुड की ओर शुरू में मिस्र के प्रदर्शनकारी भले ही आकर्षित हुए थे, लेकिन अब वह एक कमजोर हो चुका है।

जामिया मिलिया इस्लामिया में पश्चिम एशियाई अध्ययन केंद्र के जावेद खान ने कहा, "मिस्र में बड़ा सवाल यह है कि फिलहाल सत्ता कौन संभालेगा? वहां लोगों में यह भावना है कि मुस्लिम ब्रदरहुड और इस्लामी ताकतों को सत्ता में नहीं आना चाहिए। यह एक अनिश्चय की स्थिति है।"

खान ने कहा कि हाल के वर्षो में मध्य पूर्व में गहरी जड़ें जमा चुकी इस्लामी ताकतें मिस्र के घटनाक्रम पर नजर रखी हुई हैं और यदि मिस्र की आग आगे तक फैलती है तो इसे संभालने की जरूरत होगी।

जेएनयू के पश्चिम एशियाई अध्ययन केंद्र के प्रकाश सी.जैन ने कहा, "जैसे लोकतंत्र की लहर चल पड़ी है।"

जैन ने कहा कि मिस्र में पसरी गरीबी और असामानता के कारण वहां क्रांति भड़की। यद्यपि मुबारक विरोधी आंदोलन में शामिल बड़ी संख्या में लोग शिक्षित मध्यवर्गीय लोग थे, जो आजादी के भूखे थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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