माओवादियों के जन युद्ध की 15वीं बरसी का रंग फीका
काठमांडू, 12 फरवरी (आईएएनएस)। नेपाल के माओवादी लड़ाकों ने 12 फरवरी, 1996 को मात्र तीन बंदूकों, देशी बमों और एक लोहे के साथ सामाजिक परिवर्तन के लिए सशस्त्र संघर्ष की शुरुआत की थी। लेकिन ये लड़ाके इस संघर्ष की 15वीं बरसी पर आज दिशाहीन अवस्था में खड़े हैं। किसी समय अपने जनवाद के लिए चर्चित रहे माओवादियों के शीर्ष नेता इस समय आपस में तथा अन्य पार्टियों के साथ सत्ता के लिए लड़ रहे हैं।
10 वर्ष के जिस जन युद्ध ने तमात कठिनाइयों के बावजूद नेपाल की राजशाही को उखाड़ फेंका था और दुनिया के एक मात्र हिंदू राष्ट्र को धर्मनिरपेक्ष, संघीय गणतंत्र में परिवर्तित कर दिया था, आज उसे लेकर खुशी का कोई माहौल नहीं है।
जन युद्ध का नेतृत्व करने वाले क्रांतिकारी, पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' ने योजना बनाई थी कि उनकी पार्टी इस महीने सत्ता में आ जाएगी और जन युद्ध की बरसी धूमधाम से मनाई जाएगी। लेकिन ऐसा न हो सका।
अपनी योजना को मूर्त रूप देने के लिए उन्होंने इस महीने हुए प्रधानमंत्री चुनाव से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी और कम्युनिस्ट प्रमुख झलनाथ खनाल को इस उम्मीद में समर्थन दिया था कि उनकी एक कठपुतली सरकार होगी और उसकी लगाम उनकी पार्टी के पास होगी।
लेकिन प्रचंड की यह योजना खटाई में पड़ गई, क्योंकि अपने पुराने सहयोगी नेपाली कांग्रेस और अपनी ही पार्टी के साथी माधव कुमार नेपाल को धोखा देने वाले खनाल, प्रचंड के साथ किए अपने वादे से भी मुकर गए।
इसका परिणाम यह हुआ कि माओवादियों की स्थायी समिति ने शुक्रवार को पार्टी को निर्देश दिया कि वह खनाल की सरकार में शामिल न हो। और माओवादियों ने चेतावनी दी कि यदि समझौते का पालन नहीं किया गया तो वे अपना समर्थन वापस ले लेंगे।
अब माओवादी अपने कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण फिर से शुरू कर रहे हैं। यह विवादास्पद प्रशिक्षण पिछले महीने शुरू हुआ था, लेकिन प्रचंड और उनके उप बाबूराम भट्टराई के बीच पैदा हुए गम्भीर विवाद के बाद इसे बंद कर दिया गया था।
यह प्रशिक्षण पोखारा शहर में बुधवार से शुरू हुआ था। इस तरह के चार शिविर तीन अन्य प्रमुख शहरों में आयोजित किए जाएंगे और 26 फरवरी से एक सप्ताह का जन जागरण कार्यक्रम चलाया जाएगा।
पूर्व के प्रशिक्षण सत्र में कार्यकर्ताओं से कहा गया था कि उन्हें भारत के साथ एक नए जन विद्रोह के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि वह उनके रास्ते का मुख्य रोड़ा है।
इसके अलावा एक दूसरे राष्ट्रव्यापी जन जागरण कार्यक्रम की योजना बनाई जा रही है, जो इस सप्ताह से अप्रैल के प्रारम्भ तक चलेगा। अभी इस योजना की विस्तृत जानकारी घोषित की जानी बाकी है।
यद्यपि जन युद्ध की शुरुआत 12 फरवरी, 1996 को हुई थी, लेकिन माओवादी नेपाली कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन की पहले दिन, यानी रविवार को इसे मनाएंगे। शीर्ष माओवादी नेता इस सिलसिले में मध्य पश्चिम नेपाल के पिछड़े दूरवर्ती जिले, रोल्पा जाएंगे, जहां इस रक्त रंजित क्रांति की शुरुआत हुई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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