मिस्र में जल्द स्थापित हो लोकतांत्रिक सरकार: विश्व समुदाय

शुक्रवार को राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के पद से इस्तीफा देने के बाद भारत, अरब देश, पश्चिमी जगत और संयुक्त राष्ट्र ने मिस्र की इस क्रांति को ऐतिहासिक बताते हुए इसका स्वागत किया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "मिस्र के लोगों की इच्छाओं को ध्यान में रखते हुए हम राष्ट्रपति मुबारक के इस्तीफे का स्वागत करते हैं। हम सशस्त्र बलों की सर्वोच्च परिषद की उस प्रतिबद्धता का भी स्वागत करते हैं जिसमें उन्होंने लोकतांत्रिक शासन की रूपरेखा तय करने के लिए समयबद्ध तरीके से शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण का वादा किया गया है।"

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मुबारक के इस्तीफे के बाद व्हाइट हाउस में अपने छह मिनट के भाषण में कहा कि मिस्र के लोगों ने महात्मा गांधी की तरह अहिंसा की नैतिक शक्ति के जरिए हुस्नी मुबारक के तीन दशक लम्बे शासन को समाप्त करके इतिहास रच दिया है और यह एक नई शुरुआत है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक ओबामा ने कहा मिस्र की सेना ने पूरी देशभक्ति और जिम्मेदारी से अपना काम किया है अब उसे विश्वसनीयता बनाए रखते हुए सत्ता हस्तांतरण सुनिश्चित करना होगा। ओबामा ने कहा, "मिस्र के लोगों ने स्पष्ट किया है कि उन्हें लोकतंत्र से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।"

वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा कि मिस्र में 'पारदर्शी, शांतिपूर्ण और क्रमिक' रूप से सत्ता का हस्तांतरण होना चाहिए। समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता मार्टिन नेर्सिकी ने मून के हवाले से कहा, "मिस्र के लोगों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता के हस्तांतरण की आवश्यकता है।"

रूस के विदेशी मंत्री सर्गेई लोवरोव ने शुक्रवार को कहा कि उम्मीद है कि मिस्र के अधिकारी इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि सरकारी निकाय सामान्य तरीके से कामकाज करें। लोवरोव ने कहा, "हम आशा करते हैं कि ताजा घटनाक्रम से स्थिरता कायम करने में मदद मिलेगी। इसे सुनिश्चित करना होगा की सभी सरकारी निकाय सामान्य तौर पर कामकाज करें। न केवल वर्तमान सरकार बल्कि विपक्षी दल भी स्थिरता कायम करने के लिए तैयार होंगे।"

तुर्की ने मिस्रवासियों को बधाई देते हुए यह उम्मीद जाहिर की है कि नए शासन में उनकी इच्छाएं पूरी होंगी। इससे पहले राजनीतिक अस्थिरता के समय तुर्की ने मिस्र के नेताओं से लोकतांत्रिक समाधान तलाशने की अपील की थी।

तुर्की के विदेश मंत्री एहमट दावूतोगलू ने सोशल नेटवर्किं ग वेबसाइट 'ट्विटर' पर लिखा, "मिस्रवासियों को बहुत-बहुत बधाई। हमें उम्मीद है कि नया शासनतंत्र मिस्र के लोगों की उम्मीदों को पूरा करेगा।" विदेश मंत्री ने कहा, "मिस्र एक मजबूत देश है और मिस्र के संस्थानों निरंतरता काफी मायने रखती है।'

मुबारक के इस्तीफे को मिस्र की जनता की जीत बताते हुए ईरान ने मिस्रवासियों को बधाई दी और इस क्रांति के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। स्थानीय समाचार चैनल 'प्रेस टीवी' के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्री अली अकबर सलेही ने कहा, "हम महान देश मिस्र को उसकी जीत के लिए बधाई देते हैं।"

सलेही ने मिस्र की इस क्रांति को ईरान में इस्लामिक क्रांति की 32वीं वर्षगांठ से जोड़ते हुए कहा, "आज जब हम ईरान में महान इस्लामिक क्रांति की वर्षगांठ मना रहे हैं तब मिस्र में लाखों लोगों की यह जीत शानदार है। हम मिस्र के बहादुर और न्याय की इच्छा रखने वाले लोगों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हैं।" सलेही ने मिस्र की सेना से अपील की कि वह भी लोगों के लोकतंत्र समर्थक आंदोलन में शामिल हो।

वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि नई सरकार मिस्र के लोगों की इच्छाओं को पूरा करे और लोकतांत्रिक शासन स्थापित करने के लिए कदम उठाए। कैमरन ने शुक्रवार को मिस्र के लिए यादगार दिन बताते हुए कहा, "उन्होंने देश में बदलाव के लिए बहादुरी और शांतिपूर्वक तरीके से अपनी आवाज उठाई।"

उन्होंने कहा, "मिस्र के लिए यह गौरवपूर्ण उपलब्धि है। हम हर तरह से मदद देने के लिए तैयार हैं। हमें विश्वास है कि एक ऐसी सरकार का गठन होगा जो मुक्त और लोकतांत्रिक समाज को बढ़ावा देगी।"

बीबीसी के मुताबिक कैमरन ने कहा, "आज जो कुछ हुआ वह केवल पहला कदम है। आज जो मिस्र का शासन चला रहे हैं उनकी जिम्मेदारी है कि वह लोगों की इच्छाओं को पूरा करें।"

लेबनान स्थित शिया संगठन हिजबुल्ला ने शुक्रवार को मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के इस्तीफे के बाद मिस्र के लोगों को उनकी ऐतिहासिक जीत के लिए बधाई दी। हिज्बुल्ला ने कहा कि वह मिस्र के लोगों को उनकी ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण जीत के लिए बधाई देते हैं। यह जीत उनकी महान क्रांति का परिणाम है।

लेबनान के समाचार संगठन अल-मनहर की वेबसाइट पर भेजे गए एक बयान में संगठन ने कहा, "इस क्रांति में लोगों की एकता प्रदर्शित हुई, इसमें महिला, पुरुष और बच्चे सबने हिस्सा लिया। यह क्रांति तलवार पर रक्त की विजय की प्रतीक है।"

वर्ष 2006 में लेबनान के हिस्सों पर इजरायल के अतिक्रमण के विरोध के बाद हिजबुल्ला लेबनान की राजनीति में एक मजबूत संगठन के रूप में उभरा है। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने हिजबुल्ला को आतंकी संगठन घोषित किया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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