सुरक्षा परिषद में ठोस सुधार की मांग
भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान, परिषद के मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों- अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के बराबर दर्जा चाहते हैं।
इन चारों देशों के राजदूतों ने 192 देशों की महासभा के अध्यक्ष जोसेफ डीज से मुलाकात की। सुरक्षा परिषद के सुधार की जिम्मेदारी महासभा की ही है। सुरक्षा परिषद विश्व शांति एवं सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। सुरक्षा परिषद का निर्णय संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों के लिए बाध्यकारी होता है।
डीज ने कहा कि जी-4 ने सुधारों पर अपने विचार व्यक्त किए और निकट भविष्य में ठोस परिणामों तक पहुंचने की अपनी इच्छा रेखांकित की।
डीज ने यह भी कहा कि जी-4 ने स्वीकार किया कि सुरक्षा परिषद का सुधार संयुक्त राष्ट्र को विश्वसनीय बनाने के सम्पूर्ण प्रयास का हिस्सा है।
डीज ने कहा, "उन्होंने सहमति जताई कि यह सुधार, व्यापक वैश्विक शासन के एजेंडे और संगठन की विश्वसनीयता का हिस्सा हैं। संयुक्त राष्ट्र को आज की दुनिया की वास्तविकताओं के अनुकूल बनाना महत्वपूर्ण है।"
ब्राजील के विदेश मंत्री एंटोनियो डी एगियार पैट्रियोटा ने संवाददाताओं से कहा कि इस संस्था का सुधार करना इस समय ज्यादा हितकारी है। ज्ञात हो कि 15 देशों की परिषद की अध्यक्षता इस समय ब्राजील के पास है।
पैट्रियोटा ने कहा, "विकासशील दुनिया में सुधार के लिए बन रहे माहौल की मुझे जानकारी है। अतीत की बनिस्बत इस समय सुधार के लिए अधिक प्रतिबद्धता है और परिषद के सुधार में लगा गठबंधन बहुत सक्रिय जान पड़ता है। यह गठबंधन आगे बढ़ना चाहता है।"
पैट्रियोटा ने जर्मनी के विदेश मंत्री गुइडो वेस्टरवेल्ले और भारत के एस. एम. कृष्णा तथा जापान के उप विदेश मंत्री ताकेकी मात्सुमोतो से न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र स्थित भारतीय दूतावास में मुलाकात की और सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदमों के बारे में चर्चा की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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