सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा, अफजल की दया याचिका का क्या हुआ?

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को 2001 में संसद पर हुए हमले के मामले में मृत्युदंड का सामना कर रहे अफजल गुरु की दया याचिका की स्थिति की जानकारी मांगी।शीर्ष अदालत के न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति आर.एम. लोढ़ा की खंडपीठ ने अफजल की उस याचिका पर केंद्र एवं दिल्ली सरकार को नोटिस भी जारी किया, जिसमें उसने तिहाड़ जेल से श्रीनगर की किसी जेल में अपने स्थानांतरण की मांग की है।

अदालत ने शुरुआत में अफजल के क्षमा निवेदन की स्थिति के बारे में पूछा। अदालत को बताया गया कि यह विचाराधीन है। इस पर अदालत ने पूछा कि क्या अफजल गुरु या उसके परिजनों को सरकार की ओर से उसके क्षमा निवेदन के सम्बंध में कोई जानकारी दी गई।शीर्ष अदालत को बताया गया कि कोई जानकारी नहीं दी गई।

याची की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता वी.सी.महाजन ने अदालत से कहा कि नियमानुसार किसी दोषी को उसके स्थानीय जेल में कैद किया जाना चाहिए। महाजन ने अदालत से कहा कि अफजल गुरु की 90 वर्षीय मां, 11 वर्षीय बेटे और उसकी पत्नी को उससे मिलने के लिए बार-बार दिल्ली आना पड़ता है।

महाजन ने अदालत से कहा कि गुरु के परिजनों को मुझसे मिलने के लिए दिल्ली आना पड़ता है इसमें काफी खर्च होता है। उन्होंने अदालत से सरकार को यह निर्देश देने की मांग की कि वह गुरु के परिजनों को गुरु से मिलने दिल्ली आने के लिए उनके आने-जाने और ठहरने का खर्च वहन करे।

ज्ञात हो कि कश्मीर घाटी में सोपोर कस्बा निवासी गुरु को 13 दिसम्बर, 2001 को संसद पर हमले की साजिश रचने का दोषी पाया गया है और 2002 में उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2003 में गुरु की सजा की पुष्टि कर दी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने भी उसके मृत्युदंड को बरकरार रखा था। गुरु की पत्नी ने उसके बाद राष्ट्रपति के यहां दया याचिका दायर की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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