'किशोर का फिदायीन बनना एक भयावह घटना'
समाचार पत्र 'द न्यूज' ने शुक्रवार को लिखे अपने संपादकीय में कहा है कि 14 वर्षीय किशोर द्वारा किया गया आत्मघाती हमला 'कई मायनों में एक भयावह घटना है।'
पाकिस्तान में खबर पख्तूनख्वा प्रांत के मारदान में सेना के पंजाब रेजीमेंट सेंटर के परिसर के भीतर हुए आत्मघाती हमले में 20 से अधिक जवान मारे गए थे।
पत्र के मुताबिक आत्मघाती हमले के लिए किशोरों का प्रयोग किया जाना गंभीर बात है। किशोरों का प्रयोग इसलिए किया गया क्योंकि सुरक्षाबलों को उसपर शक नहीं होगा।
पत्र लिखता है, "कुछ लोग ही इस बात पर विश्वास कर पाएंगे कि इस तरह के निर्दयतापूर्ण कार्यो में बच्चों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसा कि सैन्य प्रशिक्षण केंद्र में देखने को मिला। ऐसा लग रहा है कि आतंकवादियों ने हाल ही में अपनी रणनीति का विस्तार किया है।"
आतंकवादियों द्वारा महिला आत्मघाती हमलावरों के प्रयोग को लेकर समाचार पत्र ने लिखा है, "जब महिलाओं को आत्मघाती हमलावरों के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, तो सुरक्षा की दृष्टि से यह समस्या खड़ी होती है। सामाजिक मूल्यों का हवाला देते हुए कहा जाता है कि सुरक्षा चौकियों पर महिलाओं की तलाशी नहीं ली सकती या फिर उन्हें रोका नहीं जा सकता क्योंकि इन चौकियों पर पुरुष सुरक्षाकर्मी ही तैनात होते हैं।"
गौरतलब है कि पिछले साल दिसम्बर में बजौर कबाइली क्षेत्र के खार में एक महिला आत्मघाती हमलावर ने विश्व खाद्य कार्यक्रम वितरण केंद्र के निकट खुद को उड़ा लिया था जिसमें 47 लोग मारे गए थे।
पत्र लिखता है, "मारदान की घटना से इस बात के संकेत मिलते हैं कि आतंकवादी पहले की तरह ही सक्रिय हैं। कुछ महीनों के भीतर हम ऐसी कई घटनाएं देख चुके हैं।"
पत्र के मुताबिक ऐसा प्रतीत होता है कि आतंकवादी आज भी बिना रोक टोक के अपने प्रशिक्षण शिविर चला रहे हैं और आत्मघाती हमलावर तैयार कर रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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