'पशुपतिनाथ मंदिर कोषागार पर नियंत्रण क्यों चाहती है सरकार'
संस्कृति मंत्रालय और पूर्व के मंत्रिमंडल द्वारा कोष पर नियंत्रण पाने की पहल के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश मोहन प्रकाश सितौला एवं सुशील कार्की ने सुनवाई की।
न्यायाधीशों ने सरकार से कहा, "यदि सरकार पशुपतिनाथ मंदिर की तिजोरी को खोलने का प्रयास करेगी तो इससे अपूरणीय क्षति होगी।"
ज्ञात हो कि पूर्व की सरकार के समय माधव कुमार नेपाल ने 7वीं शताब्दी के इस मंदिर के कोषागार को खोले जाने का निर्णय लिया। इसके बाद में यह मामला न्यायालय में चला गया।
हिंदुओं को मानना है कि कोषागार पर 2000 वर्षो से अधिक समय से ताला लगा है और इसे बंद रहना चाहिए।
सरकार का निर्णय है कि कोषागार में अथाह धन होने की बात कही जा रही है, उसे खोला जाना चाहिए और उसमें रखी गईं कीमती वस्तुओं की एक सूची बनाई जानी चाहिए।
हिंदू कार्यकर्ता और याचिकाकर्ता भरत मणि जंगम ने मंदिर के मुख्य कोषागार को खोले जाने के मंत्रिपरिषद के निर्णय को न्यायालय से रद्द करने की मांग की है।
याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायाधीशों ने कहा कि विवाद के समाप्त होने तक कोषागार नहीं खोला जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस बात की सफाई 15 दिनों के भीतर देने के लिए भी कहा कि वह कोषागार खोले जाने की पहल क्यों करना चाहती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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