नेपाल में नई सरकार में हिस्सा लेने से माओवादियों का इंकार
काठमांडू, 10 फरवरी (आईएएनएस)। नेपाल में सात माह तक जारी राजनीतिक संकट के बाद गत सप्ताह माओवादियों के समर्थन से झलनाथ खनाल के प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद भी यहां राजनीतिक अस्थिरता का माहौल खत्म नहीं हुआ है। माओवादियों ने खनाल की सरकार में शामिल होने से इंकार कर गुरुवार को इस संकट को और गहरा दिया।
सत्ता में भागीदारी के मुद्दे पर खनाल और माओवादी प्रमुख पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' के बीच दोबारा हुई बातचीत विफल होने के बाद माओवादी उपप्रमुख नारायण काजी श्रेष्ठ ने कहा, "प्रधानमंत्री की पार्टी यह स्पष्ट करने में विफल रही है कि हमारे बीच हुए समझौते की भावना और आशय को वह पालन करेगी या नहीं।"
श्रेष्ठ ने कहा, "उन्होंने मंत्रालय के बंटवारे को लेकर हुए समझौते का पालन करने से भी इंकार कर दिया, जिससे कारण आशंका पैदा हो गई है। इस स्थिति में पार्टी ने नई सरकार में नहीं शामिल होने का फैसला किया।"
उन्होंने कहा कि हालांकि माओवादी नई सरकार को बाहर से समर्थन देते रहेंगे।
माओवादी नेता ने इस गतिरोध के लिए विदेशी ताकतों का हाथ बताया लेकिन उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया। वैसे वर्ष 2009 में सरकार गिरने के बाद से माओवादी भारत पर दोष मढ़ते रहे हैं।
माओवादियों ने प्रधानमंत्री पद के लिए 16 दौर के चुनाव में प्रचंड को विजयी नहीं होने देने के लिए भारत को दोषी ठहराया है। दो फरवरी को हुए 17वें दौर के चुनाव में प्रचंड ने अपनी उम्मीदवारी वापस लेते हुए खनाल का समर्थन देने की बात कही। उन्होंने कहा कि नेपाल के आंतरिक मामलों में भारत का हस्तक्षेप जारी नहीं रहे, यह दिखाने के लिए उन्होंने खनाल को समर्थन दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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