टाटा समूह के भवन में आग लगने से 3 की मौत (लीड-1)
अधिकारियों ने बताया कि बेसमेंट में झरोखों को बंद करना आग लगने का कारण हो सकता है। इस हादसे में टाटा समूह के कर्मचारी फरद वाडिया, ईश्वर पटेल और शशांक पवार की मौत हो गई।
अधिकारियों के मुताबिक आग सुबह करीब 9.30 बजे लगी। आग से गंभीर रूप से झुलसे एक व्यक्ति को सर जे.जे. अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मुम्बई के मुख्य अग्निशमन अधिकारी यू. के. तटकरे ने आईएएनएस को बताया, "बेसमेंट में तीनों व्यक्ति फंसे थे और उन्होंने दम तोड़ दिया जबकि चौथे व्यक्ति को गंभीर हालत में बाहर निकाला गया।"
उन्होंने बताया कि बेसमेंट के झरोखे बंद होने की वजह से बचाव कार्य समय से शुरू नहीं किया जा सका, उनकी जगह पर एयरकंडीशनर्स लगाए गए थे। अग्निशमन विभाग की आठ गाड़ियों और चार टैंकरों ने आग पर काबू पाया।
तटकरे ने बताया कि बेसमेंट में झरोखों को बंद किए जाने से विभाग को अंदर दाखिल होने के लिए एयरकंडीशनर्स को तोड़ना पड़ा। ऐसा करने में महत्वपूर्ण समय नष्ट हुआ।
बेसमेंट में दाखिल होने पर बचावकर्मियों ने पाया कि तीन कर्मचारियों की दम घुटने से मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल था। इनके अलावा इमारत की छत पर फंसे दो अन्य लोगों को बचाया गया है।
राहत एवं बचाव कार्य चलाने के लिए इमारत के आसपास के व्यस्त इलाके में आवागमन रोक दिया गया है।
टाटा समूह के एक प्रवक्ता ने कहा, "टाटा समूह पीड़ित परिवारों के लिए अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता है। राहत की व्यवस्था की जा रही है।"
उन्होंने कहा कि अधिकारी आग लगने के कारण की जांच कर रहे हैं। टाटा समूह जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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