भारत, चीन के साथ विस्तृत सैन्य सम्बंध चाहता है अमेरिका
वाशिंगटन। अमेरिका अपनी नई सैन्य रणनीति के तहत भारत के साथ विस्तृत सैन्य सहयोग और चीन के साथ सकारात्मक, सहयोगात्मक और व्यापक सम्बंध चाहता है।नई राष्ट्रीय सैन्य रणनीति में कहा गया है, "चूंकि एशिया में सैन्य क्षमता बढ़ रही है, लिहाजा हम अधिक से अधिक क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को गति देने के नए रास्ते तलाशेंगे।"
यह दस्तावेज यहां मंगलवार को जारी हुआ। वर्ष 2004 से अमेरिकी सैन्य रणनीति में यह पहला परिवर्तन है।
एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने दस्तावेज की पृष्ठभूमि पर कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र अधिक महत्वपूर्ण होगा। अधिकारी ने कहा, "एशिया में दो उभरती ताकतें हैं - भारत और चीन- और कई क्षेत्रीय स्तर पर ताकतवर देश हैं।"
अधिकारी ने कहा कि इस क्षेत्र में अमेरिकी क्षमताओं का पलायन हो सकता है। उसने कहा, "अधिक सैनिक ही अनिवार्य रूप से इसका अर्थ नहीं हो सकता, लेकिन उसका वितरण बदल सकता है।"दस्तावेज में दक्षिण पूर्व एवं दक्षिण एशिया में नए तरीके से ध्यान देने और संसाधनों के निवेश करने की वकालत की गई है। दस्तावेज में कहा गया है, "अपनी सामूहिक शक्ति का इस्तेमाल कर हम पूरे क्षेत्र में बहुपक्षीय अभ्यासों की भागीदारी एवं अवसर को बढ़ाएंगे।"
नई रणनीति में कहा गया है, "हम अप्रसार, वैश्विक जन की हिफाजत करने, आतंकवाद से मुकाबला, और अन्य मामलों पर भारत के साथ विस्तृत सैन्य सहयोग चाहते हैं।"इसके साथ ही अमेरिका "अपने सैन्य सुरक्षा सहयोग, आदान-प्रदान, और फिलीपींस, थाईलैंड, विएतनाम, मलेशिया, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, सिंगापुर व ओशिनिया के अन्य देशों के साथ सैन्य अभ्यासों को भी बढ़ाएगा।"
नई रणनीति कहती है कि अमेरिका "चीन के साथ सकारात्मक, सहयोगात्मक, और व्यापक सम्बंध चाहता है और वह चाहता कि चीन जिम्मेदार नेतृत्व वाली भूमिका निभाए।"रणनीति में कहा गया है, "इसके समर्थन में संयुक्त बल चीन के साथ गहरा सैन्य सम्बंध चाहता है ताकि आपसी हित एवं लाभ के क्षेत्र विस्तृत हो सकें, आपसी समझ बढ़ सके, गलत धारणा घट सके, और गलत अनुमान रुक सकें।"
रणनीति में कहा गया है, "अमेरिका, लूट एवं डब्ल्यूएमडी के प्रसार के खिलाफ चीन के साथ सहयोग के जरिए आम हितों को बढ़ावा देगा और उत्तर कोरिया के साथ अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कोरियाई प्रायद्वीप में स्थिरता लाएगा।"












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