मेदांता में शुरू होगा विश्व स्तरीय चिकित्सकीय शोध केंद्र
सोमवार को मेदांता चिकित्सालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में इस सम्बंध में जानकारी दी गई। सम्मेलन में मेदांता के संस्थापक, अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक डॉ. नरेश त्रेहन ने कहा कि भारत को स्वास्थ्य क्षेत्र में विकास के लिए विदेशों का मुंह न देखना पड़े इस दृष्टि से इस केंद्र की शुरुआत बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि अब तक भारतीयों को वे दवाएं दी जाती थीं जो विकसित देशों में वहां के मरीजों पर कारगर रहीं लेकिन इस शुरुआत के साथ यहां के मरीजों पर दवाओं को लेकर शोध किया जा सकेगा और देश में ही उनके लिए ज्यादा असरदार दवाओं की पहचान कर उनके निर्माण को बढ़ावा दिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह से इन दवाओं की कीमतें भी कम होंगी।
डॉ. त्रेहन ने कहा कि दवाओं की खोज के मामले में ड्यूक विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से मदद ली जाएगी जबकि मेदांता में शोध के लिए आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। उन्होंने कहा, "ड्यूक के साथ यह समझौता भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हमारा लक्ष्य प्रमुख बीमारियों के इलाज की दिशा में सुरक्षित व तेज विकास करना है। हम उम्मीद करते हैं कि हमारी भागीदारी से दवाएं और नए इलाज विकसित हो सकेंगे और इससे भारत व दुनियाभर के स्वास्थ्य में सुधार होगा।"
इस अवसर पर मौजूद 'ड्यूक ट्रांस्लेशनल मेडीसिन इंस्टीट्यूट' के निदेशक एम. कैलिफ ने कहा, "इस साझेदारी से दवाओं और इलाज की युक्तियों को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर मिला है। यहां हम प्रौद्योगिकी के बेहतर इस्तेमाल से मानव जीवविज्ञान को और अच्छे से समझ सकेंगे।"
मेदांता परिसर में ही 27,000 वर्ग फुट क्षेत्र में एमडीआरआई की शुरुआत होगी। इसके 2011 के अप्रैल मध्य तक शुरू होने की सम्भावना हैं। यह 60 बिस्तरों वाला शोध केंद्र होगा। सिंगापुर स्थित ड्यूक राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के 'ग्रेजुएट मेडीकल स्कूल' के पूर्व प्रोफेसर टैल बर्ट को एमडीआरआई का अंतरिम चिकित्सा निदेशक बनाया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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