मुल्लापेरियार बांध पर निर्माण संविधान के खिलाफ : तमिलनाडु

वर्ष 2011-12 के लिए अंतरिम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री के. अनबाझगन ने एक बयान में कहा, "मुल्लापेरियार बांध मुद्दे पर करेल सरकार जिस तरह से काम कर रही वह संविधान के खिलाफ है और ऐसा करके वह दो पड़ोसी राज्यों के रिश्तों को भी प्रभावित कर रही है।''

वित्त मंत्री ने केरल के राज्यपाल के उस अभिभाषण का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि सरकार इस वर्ष स्वयं मुल्लापेरियार बांध पर निर्माण कार्य शुरू करेगी।

ज्ञात हो कि केरल के राज्यपाल आर.एस. गवई ने शुक्रवार को विधानसभा को सम्बोधित करते हुए घोषणा की कि सरकार इस वर्ष स्वयं मुल्लापेरियार पर एक नया बांध का निर्माण शुरू करेगी।

अनबाझगन ने कहा कि केरल सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के फरवरी 2006 के आदेश को अस्वीकार करते हुए अपने कानूनों में संशोधन किया है, जबकि उसकी वैधता को तमिलनाडु ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने केरल के इडुक्की जिले स्थित बांध के विभिन्न पहलुओं को देखने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश ए.एस. आनंद के नेतृत्व में एक अधिकार प्राप्त समिति का गठन किया।

वित्त मंत्री ने बताया कि समिति ने 21 दिसम्बर 2010 को बांध का दौरा करने के बाद वहां एक नया बांध बनाने के लिए केरल सरकार को कहा है लेकिन तमिलनाडु सरकार केंद्र सरकार से अनुरोध करेगी कि वह बांध का निर्माण करने से केरल को रोके। क्योंकि इससे दोनों राज्यों के सम्बंधों पर प्रभाव पड़ेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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