मिस्र: प्रधानमंत्री ने माफ़ी माँगी, जांच की घोषणा

मिस्र: प्रधानमंत्री ने माफ़ी माँगी, जांच की घोषणा

तहरीर चौराहे पर लोग अभी भी जमा हैं और मुबारक विरोधी नारे लगा रहे हैं.

मिस्र की राजधानी काहिरा में बुधवार को राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई झड़पों के लिए नए प्रधानमंत्री अहमद शफ़ीक ने माफ़ी माँगी है और कहा है कि इस मामले की जांच की जाएगी.

इन झड़पों में पांच लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे. इस बीच गुरुवार को भी बड़ी संख्या में राष्ट्रपति के समर्थक और विरोधी प्रदर्शनकारी तहरीर चौराहे पर जमा हुए हैं और दोनों पक्षों के बीच झड़पें हुई हैं.

मिस्र के नवनियुक्त प्रधानमंत्री अहमद शफ़ीक ने तहरीर स्केव्यर पर हुई हिंसा के लिए माफ़ी माँगी है लेकिन इन आरोपों को ग़लत बताया है कि उनके पीछे सरकार में शामिल लोगों का हाथ था.

प्रधानमंत्री शफ़ीक ने कहा है कि वे इन घटनाओं की जाँच कराएँगे और जिन लोगों को इसके लिए ज़िम्मेदार पाया जाएगा उन्हें सज़ा होगी.

टीवी पर प्रसारित एक संदेश में उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस घटना के लिए सबके सामने खुलकर माफ़ी माँगता हूँ इसलिए नहीं कि यह मेरी ग़लती थी या किसी और की. मैं तो इस बात से दुखी हूँ कि मिस्र के ही लोग इस तरह आपस में लड़ रहे हैं. फूट तो परिवारों में भी होते हैं लेकिन कल जो हुआ वह किसी योजना का हिस्सा नहीं था, मैं उम्मीद करता हूँ कि इंशा अल्लाह सब ठीक हो जाएगा.’’

मिस्र में मुबारक विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमले की घटना से साफ़ दिखा है कि वहाँ सत्ताधारी गुट में इस बात को लेकर गहरे मतभेद हैं कि इस संकट से किस तरह निबटा जाए.

राष्ट्रपति मुबारक ने टीवी पर प्रसारित संदेश में वादा किया था कि वे सितंबर में अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद पद छोड़े देंगे और अगले चुनाव में प्रतिद्वंद्वी नहीं होंगे.

इसके बाद तहरीर स्कवेयर पर जमा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को जिस तरह निशाना बनाया गया उसमें हुस्ने मुबारक की सरकार में शामिल कुछ शक्तिशाली लोगों का हाथ बताया जा रहा है.

मुबारक विरोधी प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन पर हमला करने वाले लोग मुबारक समर्थक नहीं बल्कि सेना या पुलिस के लोग थे जिन्होंने अपनी वर्दी नहीं पहनी थी.

सत्ताधारी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बिना किसी का नाम लिए अपनी ही पार्टी के एक व्यक्ति को बुधवार की हिंसा के लिए दोषी ठहराया है.

तहरीर चौक पर हुई हिंसा की घटना के समय और पिछली रात वहीं मौजूद एक मुबारक विरोधी एक प्रदर्शनकारी का कहना था, ‘‘गोलियाँ चल रही थीं, आँसू गैस के गोले दाग़े जा रहे थे. मैंने अपनी आँखों से उन लोगों को देखा है जिन्हें गोलियाँ लगी थीं. मैंने तो एक ऐसे व्यक्ति को देखा जिसके सिर में गोली लगी थी, बहुत ही भयानक रात थी और माहौल बहुत ही तनावपूर्ण था. सारे लोग थके हुए और घायल हैं, पूरी रात हम घिरे हुए थे. उन्होंने तहरीर स्क्वेयर तक आने वाले सारे रास्ते बंद कर दिए थे ताकि हमसे जुड़ने के लिए और लोग न आ सकें, हम तक खाना पानी न पहुँच सके, जो प्रदर्शनकारी अपने घर जाने की कोशिश कर रहे थे उनमें से कई लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया है. ’’

प्रदर्शनकारियों पर हमले के समय कई जगहों पर सैनिक मूक दर्शक बने रहे जबकि कुछ स्थानों पर उन्होंने टकराव रोकने की कोशिश की.

कुछ लोगों का कहना है कि इन प्रदर्शनों से किस तरह निबटा जाए इसे लेकर सेना में भी गहरी फूट है.

तहरीर चौक पर संघर्ष की पश्चिमी देशों ने कड़ी आलोचना की है.

प्रदर्शनकारी फिर एकत्र

उधर प्रदर्शनकारी फिर काहिरा में एकत्र होने शुरु हो गए हैं और रास्तों पर नई बाधाएं खड़ी कर रहे हैं.

बुधवार को हुई झड़पों के बाद अनेक देशों ने मिस्र की सरकार की आलोचना की थी.

राजधानी काहिरा की सड़कों पर रातभर गोलीबारी की आवाज़ें सुनाईं देती रहीं हैं और जगह जगह आगजनी की घटनाएं हुईं. राजधानी काहिरा में स्थिति काफ़ी तनावपूर्ण है.

पिछले आठ दिन से काहिरा के तहरीर चौक पर जारी प्रदर्शनों और हिंसा में सौ से अधिक लोग मारे गए हैं. मिस्र के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बुधवार को हुए संघर्ष में पांच लोगों की मौत हो गई है और 600 से ज़्यादा घायल हुए हैं.

अभी तक सेना ने इसमें हस्तक्षेप से इनकार किया है.

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