चिदम्बरम ने सुषमा से कहा, थॉमस मामले में भ्रमित न करें
नई दिल्ली। केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) के पद पर पी. जे. थॉमस की नियुक्ति के मामले में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज के आरोपों को खारिज करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने बुधवार को कहा कि सुषमा इस तरह के बेतुके बयान देकर स्वयं को ही उलझा रही हैं।
सुषमा ने चिदम्बरम पर सीवीसी की नियुक्ति समिति को भ्रमित करने का आरोप लगाया था। चिदम्बरम ने एक बयान जारी कर कहा, "मैं स्वराज के बयान पर आपत्ति जाहिर करता हूं, जिसमें उन्होंने कहा है कि 'मैंने चयन समिति को भ्रमित किया' और समिति से कहा कि थॉमस बरी हो चुके हैं।"
उन्होंने कहा, "दरअसल, स्वराज इस तरह के बेतुका बयान देकर खुद को उलझा रहीं हैं।"
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता सुषम स्वराज ने मंगलवार को दावा किया था कि चार सितम्बर को चयन समिति की बैठक में चिदम्बरम ने कहा था कि थॉमस पामोलिन तेल आयात मामले में बरी हो चुके है। चिदम्बरम ने कहा, "सबसे पहले, यदि स्वराज ने माना है कि 1999 तक थॉमस के खिलाफ मामला चलाने की मंजूरी नहीं दी गई थी, तो कैसे थॉमस के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ा और उन्हें बरी कर दिया गया।"
उन्होंने कहा, "दूसरी बात, यदि सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई रोक दी थी, जैसा कि स्वराज ने माना है, तो क्या इससे स्वत: साबित नहीं होता कि मामला लम्बित है और कोई भी व्यक्ति न तो दोषी ठहराया गया है और न ही बरी किया गया है।"
बयान में कहा गया है, "मैं दोहरा रहा हूं कि समिति पामोलिन मामले से परिचित थी कि 1999 से थॉमस के खिलाफ मामला चलाने की मंजूरी लम्बित है, मामला निचली अदालत में लम्बित है, सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई पर रोक लगा रखी थी और तत्कालीन सीवीसी ने थॉमस के संदर्भ में आरोप मुक्त करार दिया था।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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