आरुषि हत्याकांड: सीबीआई की हार, या कातिल की जीत

देखा जाए तो सीबीआई ने आरुषि मामले में बहुत जल्दी हार मान ली। तमाम शक गहराने के बाद भी सीबीआई पुख्ता सबूत जुटाने में विफल रही। हम अगर हत्या के बाद हुए खेल पर गौर करें तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामन आते हैं।
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर को फोन
सबसे पहला कि आरुषि का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर को किसने फोन किया। अगर सीबीआई को तलवार के बड़े भाई पर शक है, तो क्या उनसे कड़ी पूछताछ की गई। क्या आरुषि की हत्या के पहले उसके साथ दुष्कर्म हुआ था या नहीं, यह बात उसके कौमार्य के बदले जाने से ही दफ्न हो गई। सीबीआई की रिपोर्ट में सबसे बड़ी बात यह सामने आयी है, कि हत्या के बाद आरुषि के शरीर को साफ किया गया था। उसके शरीर को किसने साफ किया, क्यों किया यह सवाल अनसुलझा है।
हत्या की रात अचानक छत पर ताला डाल दिया गया। वहीं आरुषि के कमरे का ताला सिर्फ बाहर से खुलता था और उसकी चावी जब उसकी मां नूपुर तुलवार के पास रहती थी, तो हत्यारा कमरे के अंदर कैसे दाखिल हुआ। हत्या के पहले आरुषि के कमरे में जमकर मारपीट व झगड़ा हुआ था। यही कारण था कि हत्या के बाद कमरे की साफ सफाई की गई।
कत्ल के बाद पुलिस ने आरुषि व हेमराज दोनों के कमरे की तस्वीरें खींची, लेकिन उन तस्वीरों में हेमराज के कमरे में सिर्फ एक ही स्टिक रखी नजर आ रही है। फोटो से 5 नंबर की स्टिक गायब थी। पुलिस ने जब उस स्टिक के बारे में राजेश तलवार से पूछा तो वो कुछ नहीं बता पाए। करीब एक साल बाद जब वो स्टिक मिली और सीबीआई को सौंपी गई, तो पता चला कि उसे अच्छी तरह चमकाकर पॉलिश कर दिया गया।
राजेश तलवार पर अब भी शक
ज्ञात हो कि गत 16 मई 2008 को आरुषि की हत्या उसके कमरे में कर दी गई थी। उसकी हत्या का शक पहले तलवार के घरेलू नौकर हेमराज पर जताया गया, लेकिन अगले दिन उसका शव तलवार के घर की छत पर मिला। बाद में पुलिस ने राजेश तलवार को हत्या का आरोपी बनाया और उन्हें 50 दिनों तक जेल में रहना पड़ा, लेकिन सबूतों के अभाव में उन्हें रिहा कर दिया गया।
इसके बाद सीबीआई ने तलवार के क्लिनिक में काम करने वाले कृष्णा और दो अन्य नौकरों राजकुमार एवं विजय मंडल को गिरफ्तार किया, लेकिन ये सभी साक्ष्यों के अभाव में छोड़ दिए गए। इस हत्याकांड में कोई सुराग नहीं मिलने पर सीबीआई ने इस मामले को अनसुलझा मामला बताते हुए बुधवार को न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी।
गाजियाबाद न्यायालय में दायर अंतिम रिपोर्ट में सीबीआई ने शक के घेरे में केवल राजेश तलवार को लिया है। जांच एजेंसी ने आरुषि की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए घरेलू नौकरों को निर्दोष बताया है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो इतने तथ्यों के बावजूद अगर सीबीआई ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं, तो यह उसकी सबसे बड़ी हार है। वहीं गाजियाबाद के पौश इलाके में दो-दो हत्याओं को अंजाम देने के बाद भी अगर कोई कातिल खुला घूम रहा है, तो वो उसकी सफलता है और उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए कलंक।
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