संसदीय मूल्यों की रक्षा के प्रति समर्पित थे भगत

नई दिल्ली। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल बलिराम भगत का 89 वर्ष की अवस्था में रविवार को यहां एक अस्पताल में निधन हो गया। स्वतंत्रता आंदोलन से अपनी राजनीति में कदम रखने वाले भगत ने लोकतांत्रिक मूल्यों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजनीतिक जीवन में ऐसे कई मौके आए जब उन्होंने एक सफल नेतृत्वकर्ता और कुशल प्रशासक के रूप में अपने को साबित किया। बलिराम भगत का जन्म सात अक्टूबर 1922 को पटना (बिहार) में हुआ। पटना कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद भगत ने पटना विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की।

भगत में बचपन से ही देश प्रेम की भावना इतनी प्रबल रही कि उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़चढ़ कर भाग लिया। भगत ने वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। इस दौरान वह करीब 2 वर्षों तक भूमिगत रहे और आंदोलन में अपने दायित्वों को अंजाम दिया। स्वतंत्रता के बाद भगत वर्ष 1950 में अस्थायी संसद के सदस्य चुने गए। इसके बाद वह पहली, दूसरी, तीसरी, चौथी तथा पांचवी लोकसभा के लगातार सदस्य बने। भगत सातवीं तथा आठवीं लोकसभा के सदस्य भी निर्वाचित हुए। इतने लम्बे सार्वजनिक तथा राजनीतिक जीवन में भगत ने भारत सरकार में अनेक मंत्रालयों का कार्यभार संभाला।

वर्ष 1952 से 1956 तक भगत वित्त मंत्रालय में संसदीय सचिव रहे और वर्ष 1956 में इसी मंत्रालय के उप मंत्री बनाए गए। इस दायित्व का उन्होंने अगले सात वर्षों तक लगातार निर्वहन किया।वर्ष 1963 से 1967 तक भगत योजना मंत्रालय में राज्य मंत्री और कुछ समय तक रक्षा एवं विदेश मंत्रालय में सेवाएं दीं। भगत को वर्ष 1969 में इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्रालय का कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इसके अलावा भगत वर्ष 1985 से 1986 तक विदेश मंत्री भी रहे।

भगत को 5 जनवरी 1976 को पांचवी लोकसभा का सभापति चुना गया। वर्ष 1993 में इन्हें थोड़े समय के लिए हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल और 30 जून 1993 से 1 मई 1998 तक राजस्थान का राज्यपाल बनाया गया। राजस्थान के राज्यपाल के रूप में भगत ने अपनी सरलता, सादगी, आदर्श व्यवहार तथा सद्भाव की अमिट छाप छोड़ी।

भगत ने अपने लम्बे संसदीय जीवन में अनेक देशों की यात्राएं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संसदीय दल का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 1976 में लंदन में आयोजित राष्ट्रमंडल देशों के सभापतियों के सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करने के साथ-साथ वर्ष 1953 से 1964 तक कई बार कोलम्बो प्लान के सम्मेलनों में शिरकत की।

भगत ने वर्ष 1955 में टोक्यो में आयोजित एशिया तथा सुदूरपूर्व देशों के संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक आयोग के सम्मेलन में भाग लिया। इसके अलावा भगत ने वर्ष 1968 में दिल्ली में आयोजित व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में भारतीय दल के नेता के रूप में भाग लिया।

भगत के निधन से देश ने एक सच्चा देश प्रेमी, कुशल व अनुभवी प्रशासक तथा संसदीय मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्घ एक संकल्पित व्यक्तित्व खो दिया।

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