विप्रो शाम तक चुकाए 24 करोड़ रुपये :कर्नाटक हाईकोर्ट
विप्रो सॉफ्टवेयर पुनर्निर्यात पर कर विवाद के मामले में का नूनी लड़ाई लड़ रही है। कंपनी ने न्यायालय के 10 दिसम्बर के आदेश को पूरा नहीं किया था। इस आदेश में न्यायालय की एक सदस्यीय पीठ ने कम्पनी को वैट की 50 प्रतिशत राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया था और कर छूट प्राप्त करने के लिए 24 दिसम्बर तक वाणिज्यिक कर मामलों के लिए अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील करने को कहा था।
लेकिन कंपनी द्वारा न्यायालय के आदेश की अवमानना किए जाने के कारण न्यायमूर्ति वेणुगोपाल गौड़ा और न्यायमूर्ति बी.वी. पिंटो की अवकाशकालीन खंडपीठ ने सॉफ्टवेयर पुनर्निर्यात पर चार प्रतिशत के मूल्य संवर्धित कर (वेट) लगाए जाने पर रोक लगाने की कम्पनी की अपील पर सुनवाई से इंकार कर दिया।
कम्पनी के अधिकारियों ने इस मामले में टिप्पणी करने से इंकार करते हुए कहा, "यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है और हमारे कानूनी विशेषज्ञ इस मामले को देख रहे हैं।" उल्लेखनीय है कि विप्रो पर वाणिज्यिक कर विभाग ने कर्नाटक हाईकोर्ट में मामला दर्ज कराया है। कंपनी द्वारा इस राशि का भुगतान नहीं किए जाने पर वा णिज्यिक कर विभाग ये कदम उठाने पर मजबूर हुआ।













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