इंदिरा गांधी के 'आपातकाल' में संजय गांधी थे 'निरंकुश'

इस किताब में गांधी परिवार के दिवंगत दिग्गजों से लेकर वर्तमान नेताओं तक की उपलब्धियों और खामियों का सिलसिलेवार विश्लेषण है। इस किताब को भारत को आर्थिक सुधार और वैश्वीकरण के प्रगति पथ पर ले जाने का सारा श्रेय लेते हुए तैयार किया गया है। इस किताब में कांग्रेस ने स्वतंत्र भारत के इतिहास के काले अध्याय यानी आपातकाल के लिए भी एक प्रमुख कांग्रेसी नेता को जिम्मेदार बताया है। कांग्रेस पर आधारित इस किताब का संपादन वर्तमान वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने किया है।
इस किताब में जिन मुख्य अध्यायों का समावेश किया गया है, उसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं-
1. इंदिरा गांधी ने संपूर्ण क्रांति के आंदोलन के दौरान लगाई इमर्जेंसी, जुटाई असीमित शक्ति।
2. संपूर्ण क्रांति आंदोलन के अगुआ जयप्रकाश नारायण ईमानदार नेता थे पर सिद्धांतों के ढीले थे।
3. संजय गांधी के 'झुग्गी हटाओ' और 'परिवार नियोजन कार्यक्रम ने इमर्जेंसी के दौरान जनता में भरी निराशा अन्यथा शुरुआत में लोग प्रशासन की व्यवस्था से खुश थे।
4. राजीव गांधी ने पार्टी में सुधार के लिए लगातार बदली अपनी टीम और नेता पर पार्टी में सुधार करने में विफल रहे।
5. विधानसभा चुनावों में किये गए बेहतर काम के लिए राहुल गांधी की पीठ ठोंकी गई है। हालांकि इस पूरी किताब में बिहार में किए गए उनके काम का उल्लेख कहीं नहीं है, जहां से राहुल के लाख प्रयासों के बाद भी कांग्रेस का सूपड़ा इस साल साफ ही रहा।












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