आंध्र में अनूठा 'रोटी महोत्सव'
यह अनूठा महोत्सव हर वर्ष नेल्लोर चेरुवू (झील) के किनारे स्थित बाड़ा शहीद दरगाह में आयोजित किया जाता है। यहां 12 शहीदों के शव दफन किए गए हैं।जिन शहीदों के शव यहां दफन किए गए हैं, उन्होंने 1751 में गांडावरम के पास ब्रिटिश सैनिकों के साथ संघर्ष में अपनी कुर्बानी दी थी।इस दरगाह का नाम बाड़ा शहीद दरगाह इसलिए पड़ा क्योंकि यहा शहीदों के सिर विहीन शव दफनाए गए थे।
तीन दिवसीय इस महोत्सव की खासियत यह है कि श्रद्धालु अपनी फलित इच्छाओं के बदले शहीदों को रोटी अर्पित करते हैं और जो लोग अपनी इच्छाओं को पूरा करना चाहते हैं, वे इन रोटियों को उठा लेते हैं।आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक व अन्य राज्यों के साथ ही विदेशों से भी तमाम लोग शिक्षा से लेकर रोजगार, शादी से लेकर बच्चों की कामना और बीमारी से मुक्ति से लेकर समृद्धि की अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए यहां आते हैं।
यहां स्थित झील में पवित्र डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालु यहां स्थित दुकानों से विशेष नाम की रोटियां खरीदते हैं और एक प्रार्थना के बाद रोटियों का आदान-प्रदान करते हैं।यहां की दुकानों पर सौभाग्य, विद्या, उद्योग, विवाह, संतान, धन सम्बंधी अलग-अलग रोटियां बिकती हैं।श्रद्धालु मानते हैं कि इससे उनकी इच्छाएं पूरी होंगी। कर्नाटक के गुलबर्गा जिले से अपनी पत्नी सहित यहां आए प्रकाश गौड़ ने कहा, "हम एक बच्चे की कामना के साथ पिछले तीन वर्षो से यहां आ रहे हैं।"
यहां समय-समय पर जरूरत के हिसाब से रोटियों के नाम बदल जाते हैं। उदाहरण के तौर पर यहां उन लोगों के लिए वीजा रोटी भी है, जो नौकरी के लिए अमेरिकी या अन्य किसी देश में जाने के लिए वीजा चाहते हैं।दरगाह प्रबंधन समिति के अनुसार यहां इस तरह के तमाम लोग आ रहे हैं, जो पृथक तेलंगाना राज्य को लेकर जारी आंदोलन के मद्देनजर राज्य की एकता के लिए प्रार्थना करते हैं।













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