संचार उपग्रह का प्रक्षेपण विफल, रॉकेट में विस्फोट
श्रीहरिकोटा। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को उस समय जबरदस्त आघात पहुंचा जब शनिवार को उसके अत्याधुनिक संचार उपग्रह जीसेट-5पी के प्रक्षेपण के मिनट भर के भीतर ही उसमें विस्फोट हो गया। इसरो का कहना है कि रॉकेट से 45 सेकेंड के बाद उससे सम्पर्क टूट गया। उपग्रह दूरसंचार क्षेत्र और मौसम विभाग की सेवाओं में इजाफा करने के उद्देश्य से छोड़ा गया था।इसरो के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने कहा कि प्रक्षेपण का पहला चरण 50 सेकेंड तक ठीक तरीके से काम करता रहा और इसके बाद रॉकेट अपने पथ से भटकने लगा।
उन्होंने पत्रकारों को बताया, "रॉकेट को प्रक्षेपित करने के 45 सेकेंड बाद उससे नियंत्रण टूट गया। पहले चरण में ही नियंत्रण आदेशों ने काम करना बंद कर दिया।"राधाकृष्णन के मुताबिक प्रक्षेपण के 63वें सेकेंड में रॉकेट को नष्ट करने का बटन दबाया गया।
उल्लेखनीय है कि करीब 125 करोड़ रुपये की लागत और 2310 किलोग्राम वजन वाला जीसेट-5पी उपग्रह दूरसंचार क्षेत्र और मौसम विभाग की जरूरतें पूरा करने वाला था। इसे शाम 4.04 बजे श्रीहरिकोटा रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र से प्रक्षेपित किया गया।यह वर्ष 1999 में प्रक्षेपित किए गए इनसेट 2ई उपग्रह का जगह लेने वाला था।
यह रॉकेट तेज आवाज के साथ, अपने पिछले हिस्से से नारंगी रंग की मोटी लपटें उगलते हुए आसमान की तरफ बढ़ा और अचानक उसमें विस्फोट हो गया और यह टुकड़े-टुकड़े हो गया।इसके नाकाम होते ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में मायूसी छा गई।
इसरो के पूर्व अध्यक्ष यू. आर. राव ने कहा कि यह पहला मौका है जब उन्होंने प्रक्षेपण के पहले चरण में नाकामी देखी है।उन्होंने कहा, "बिना किसी आंकड़े के इस बारे में टिप्पणी करना अनुचित होगा। प्रक्षेपण में नाकामी रॉकेट को पर्याप्त बल न मिलने अथवा नियंत्रण व्यवस्था में खराबी के चलते हो सकती है।"हमारे रॉकेट प्रक्षेपण के पहले दो चरण पीएसएलवी (पोलर सेटेलाइट लांच वेहिकल) और जीएसएलवी (जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लांच वेहिकल) के लिए एक ही तरह के हैं।
राव ने आईएएनएस को बताया, "मैं इसे धक्का नहीं मानूंगा क्योंकि रॉकेट और अंतरिक्ष अभियानों में असफलता होती है। रॉकेट विज्ञान में और उसके प्रक्षेपण के प्रत्येक स्तर पर सावधानी बरतनी पड़ती है, जरा सी चूक समस्या खड़ी कर सकती है।"यह प्रक्षेपण पहले 20 नवम्बर को होने वाला था लेकिन रूस में निर्मित क्रायोजनिक इंजन के एक वॉल्व में रिसाव होने की वजह से इसे टाल दिया गया।बाद के परीक्षणों में वॉल्व का टिकाऊपन सुनिश्चित होने के बाद प्रक्षपेण के लिए 25 दिसम्बर का दिन तय किया गया।
रूस ने काफी अर्सा पहले भारत को सात क्रायोजनिक इंजन दिए थे और भारत उनमें से छह को आज तक इस्तेमाल कर रहा था।अनुमान लगाया गया था कि जीसेट-5पी का जीवनकाल 13 साल से ज्यादा का होगा। इसके 36 ट्रांसपोंडर थे। इस प्रक्षेपण के कामयाब रहने से कक्षा में मौजूद इसरो की ट्रांसपोंडर क्षमता 200 से बढ़कर 235 हो जाती।
उल्लेखनीय है कि इसके पहले इसरो को सितम्बर 2007 में संचार उपग्रह इनसेट 4 सीआर को कक्षा में स्थापित करने में असफलता हाथ लगी। वर्ष 2010 में इसरो ने दो महत्वपूर्ण उपग्रह जीएसएटी 4 और काटरेसेट 2 प्रक्षेपित किए हैं।जीएसएटी-4 को अंतरिक्ष में ले जा रहे रॉकेट के बंगाल की खाड़ी में नष्ट हो जाने पर यह प्रक्षेपण नाकाम हो गया, जबकि काटरेसेट 2 कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हो गया।












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