पाकिस्तान 26/11 के साजिशकर्ताओं को सजा दे : मेदवेदेव
नई दिल्ली। भारत और रूस ने 'अपनी विशेष सामरिक भागीदारी' का उल्लेख करते हुए मंगलवार को संयुक्त रूप से अत्याधुनिक लड़कू जेट विमानों के विकास सहित अरबों डॉलर के कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए। रूस ने पाकिस्तान से 26 नवंबर 2008 के मुम्बई हमलों की 'योजना बनाने वालों और षडयंत्रकारियों' को सजा देने की बात कही।
दोनों देशों ने वर्ष 2015 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य रखा। इसके अलावा दोनों पक्षों ने आर्थिक मसलों पर अपने सम्बंधों को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए। रूस ने 'आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ के लिए स्वर्ग बने पाकिस्तान और अफगानिस्तान' से इन तत्वों के खात्मे का आह्वान किया। साथ ही उसने अफगानिस्तान में अपने परामर्श केंद्रों के विस्तार पर सहमति दी।
रूस ने इस दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत के दावे का समर्थन किया। राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव ने कहा, भारत एक 'मजबूत और हकदार उम्मीदवार है।'
उधर, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत के लिए रूस के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, "भारत की परिस्थितियां चाहे जैसी भी रही हों, रूस ने भारत के साथ हमेशा दोस्ती निभाई है। हमारी एक दूसरे के साथ विशेष सामरिक भागीदारी है। रूस के साथ हमारी भागीदारी होने के साथ ही अन्य देशों से भी सम्बंध बनते रहेंगे। "
दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर देर रात नई दिल्ली पहुंचे रूसी राष्ट्रपति दमित्रि मेदवेदेव और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की उपस्थिति में इन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। विज्ञान व तकनीकी सम्बंधों को और मजबूती देने के मकसद से भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और रूस के परमाणु ऊर्जा सहयोग विभाग रोसएटम के बीच सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए। तेल व ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों में समझौता ज्ञापन हुआ।
भारत और रूस ने पांचवी पीढ़ी के अत्याधुनिक और चुपके से मार करने वाले (स्टील्थ) लड़ाकू विमान की डिजाइन तैयार करने व उसके उत्पादन की संयुक्त परियोजना को मंजूरी दी है। इसके तहत दोनों देशों ने एक प्राथमिक डिजाइन करार पर हस्ताक्षर किया। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान (एफजीएफए) के लिए हुए प्राथमिक डिजाइन करार के तहत लड़ाकू विमान की संयुक्त रूप से डिजाइन तैयार करना और उनका विकास करना शामिल है।
एक एफजीएफए के निर्माण पर कम से कम 10 करोड़ डॉलर की लागत आएगी और वायु सेना 2017-18 से इस तरह के कोई 300 विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना में है। यह कुल 30 अरब डॉलर का सौदा होगा।
इससे पहले, मनमोहन सिंह और मेदवेदेव के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई जो लगभग दो घंटों तक चली। इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर दोनों देशों के बीच वार्ता हुई, जिनमें नागरिक परमाणु सहयोग, द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों में तेजी लाना, वैश्विक आतंकवाद और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संकट भी शामिल था।
बाद में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए मेदवेदेव ने कहा, "रूस चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सीट मिले।"
रूस ने एनएसजी और मिसाइल टेक्न ोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) में भारत की सदस्यता के दावे का भरपूर समर्थन किया। इसके साथ ही तमिलनाडु में अतिरिक्त परमाणु रिएक्टर स्थापित करने, अंतरिक्ष विज्ञान में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
ज्ञात हो कि सरकारी परमाणु कम्पनी, रोसएटम की सहयोगी इकाई एटमस्ट्रोयएक्सपोर्ट, भारतीय परमाणु विद्युत निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के साथ मिल कर कुदनकुलम में 1,000 मेगावाट के दो रिएक्टर स्थापित कर रही है और इसके अलावा अतिरिक्त रिएक्टर लगाने के लिए बातचीत कर रही है।
दोनों देशों की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में आतंकवाद को समाप्त करने के मुद्दे पर सहयोग बढ़ाने की भी बात कही गई। आईएएनएस के सवाल पर मेदवेदेव ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा, "कोई भी सभ्य राष्ट्र आतंकवादियों को बचाने का काम नहीं कर सकता।"
मेदवेदेव ने कहा, "आतंकवादी अपराधी हैं। निश्चित तौर पर उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। जो आतंकवादियों को छुपाते हैं, वे अपने अपराधों पर पर्दा डालते हैं। कोई भी सभ्य राष्ट्र आतंकवादियों को बचाने का काम नहीं कर सकता।"
मनमोहन सिंह ने इस मौके पर कहा, "भारत और रूस दोनों ही आतंकवाद से पीड़ित हैं। इसलिए इस खतरे से निपटने में दोनों देशों के प्राकृतिक हित शामिल हैं। प्रभावी तरीके से इससे निपटने के लिए हमें सूचना और खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान करना चाहिए।"
भारत और रूस के बीच परमाणु हथियारों के आतंकियों के हाथ न लगने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की बातचीत के साथ ही अमेरिका और फ्रांस के बाद अब मंगलवार को रूस ने भी विशिष्ट परमाणु समूह और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारतीय सदस्यता के दावे का समर्थन कर दिया।
मनमोहन सिंह और दमित्री मेदवेदेव के बीच मंगलवार को विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ नागरिक परमाणु सहयोग को और आगे ले जाने और परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए भी सहयोग करने से संबंधित बातचीत हुई।
परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किया गया।
रूस ने छह देशों के 'शंघाई कोऑपरेशन आर्गनाइजेशन' और 'एशिया पेसिफिक इकॉनमिक कोऑपरेशन फोरम' (अपेक) की सदस्यता के लिए भारत का समर्थन किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications