किसान उतरे सड़कों पर, थम गया भोपाल
भोपाल। बिजली, खाद सहित विभिन्न मांगों को लेकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की सड़कों पर उतरे हजारों किसान आसानी से मानने को तैयार नहीं है। उन्होंने आदेश मिले बिना सड़क से न हटने का एलान कर दिया है। किसानों के धरना प्रदर्शन के चलते भोपाल की रफ्तार थम गई है। मुख्यमंत्री के आवास के करीब किसान डेरा डाले हुए हैं।
किसानों का आरोप है कि उन्हें जरूरत के मुताबिक बिजली नहीं मिल रही है, नकली खाद ने उनकी मुसीबत को और बढ़ाने का काम किया है। इतना ही नहीं किसानों पर बिजली बिल जमा न करने और चोरी के फर्जी मामले दर्ज किए जा रहे हैं। इसके अलावा राजस्व विभाग सहित अन्य विभाग किसानों की समस्याएं हल करने को तैयार नहीं है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से संबद्घ भारतीय किसान संघ के आह्वान पर विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश भर से जुटे हजारों किसानों ने सोमवार को भोपाल की यातायात व्यवस्था को चरमरा कर रख दिया। सुबह से लेकर शाम तक प्रमुख सड़कों से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक जाने वाली सड़क पर आवागमन ठप रहा। किसान पॉलीटेकि्नक चौराहे से लेकर रोशनपुरा, कमला पार्क और राजभवन की ओर जाने वाली सड़कों पर कब्जा जमाए बैठे हैं।
किसानों के धरना प्रदर्शन के चलते शहर की नगर परिवहन सेवा लड़खड़ा गई। लक्ष्मीबाई महाविद्यालय सहित कई अन्य कालेजों की परीक्षाएं स्थगित करना पड़ी है। इतना ही नहीं शिक्षण संस्थान जाने वाले छात्रों एवं कर्मचारियों को दिन भर परेशानियों का सामना करना पड़ा।
किसान नेता शिवकुमार शर्मा का कहना है कि किसान लगातार अपनी मांगों से सरकार को कई बार अवगत करा चुके हैं, मगर सरकार ने उसे गंभीरता से नहीं लिया और किसानों को मजबूर होकर भोपाल की सड़कों पर उतरना पड़ा है। किसान सड़क पर तब तक डटे रहेंगे जब तक सरकार मांगे नहीं मानते हैं।
किसानों के प्रदर्शन के मसले पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि प्रशासन इसे देख रहा है। वहीं कृषि मंत्री राम कृष्ण कुसमारिया का कहना है कि उनके विभाग ने किसानों की मांगें मान ली हैं, किसानों की मांगें अन्य विभागों को लेकर है।प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से किसान रविवार की रात से ही भोपाल पहुंचने लगे थे, सुबह होने तक शहर की सड़कों पर सिर्फ ट्रैक्टर-ट्राली में किसान व उनका झुंड ही नजर आ रहा था। इतना ही नहीं किसानों ने रास्ते जाम करने के लिए ट्रैक्टर ट्रालियां फंसा दी थी।
हाथों में डंडा थामे किसान कई दिनों तक भोपाल में डेरा डालने के लिए पूरी तैयारी से आए हैं। उन्होंने कई जगह खुले मैदानों और कई आवासों के बगीचों में डेरा डाल लिया है, खाना बनाने और सोने का पूरा इंतजाम है।किसानों के प्रदर्शन के चलते पुलिस भी असहाय नजर आई और वह आंदोलन कारियों को सड़कों से हटा नहीं पाई। कई स्थानों पर राहगीरों और आंदोलनकारी किसानों के बीच विवाद की स्थितियां भी बनी।
इतना ही नहीं देर रात तक आंदोलनकारी किसानों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच मांगों पर बातचीत हुई लेकिन बात नहीं बन पाई। किसान प्रतिनिधि जहां लिखित में आश्वासन चाह रहे थे वहीं सरकार के प्रतिनिधियों ने इस प्रक्रिया को पूरा करने में समय लगने की बात कहकर मंजूरी जताने में असमर्थता जताई।












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