चुनौतियों के बीच कांग्रेस का महाधिवेशन

चुनौतियों के बीच कांग्रेस का महाधिवेशन
रविवार से दिल्ली में कांग्रेस का दो दिनों का महाधिवेशन शुरु हो रहा है.

इस महाधिवेशन में कांग्रेस को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा करनी है और अगले साल होने वाले पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं को अपनी रणनीति से अवगत करवाना है.

देश भर के कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता इस आयोजन में ऐसे समय में एकत्रित हो रहे हैं जब एक ओर कांग्रेस भ्रष्टाचार के मुद्दों से घिरी हुई है और दूसरी ओर विकीलीक्स के दस्तावेज़ों ने उसकी मुसीबत को बढ़ा दिया है.

इस महाधिवेशन के ठीक पहले संसद से शीतकालीन सत्र में कामकाज को ठप्प करके विपक्ष ने संकेत दे दिए हैं कि वह सिर्फ़ हाशिए पर नहीं है और वह यूपीए सरकार के लिए कभी भी चुनौती खड़ी कर सकते हैं.

यह पहली बार है जब कांग्रेस के महाधिवेशन में विदेशों से कांग्रेस प्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किया गया है. देश भर के कार्यकर्ता महाधिवेशन में शामिल हो रहे हैं. दिल्ली में 32 साल बाद हो रहा महाधिवेशन शहर से 15 किमी दूर बुराड़ी में हो रहा है.

सम्मेलन सुबह दस बजे शुरु होगा. इसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के अलावा लगभग सभी राष्ट्रीय नेता, कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्य कांग्रेस के अध्यक्षों के अलावा देश भर के कार्यकर्ता हिस्सा लेंगे.

एक अनुमान है कि आयोजन स्थल पर लगभग 18 हज़ार नेता और कार्यकर्ता एकत्रित होंगे. महाधिवेशन में चार प्रस्ताव पास किए जाएंगे. ये राजनीतिक, आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय मामलों के अलावा कांग्रेस के 125 वर्ष पूरे होने से संबंधित हैं.

शनिवार को हुई विषय समिति की बैठक में इन प्रस्तावों को मंज़ूरी दे दी गई है. महाधिवेशन में एक प्रस्ताव यह भी लाने पर सहमति बनी है कि कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव अब पाँच साल में हों.

सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद यह पार्टी का तीसरा लेकिन यह शायद सबसे चुनौती भरा महाधिवेशन है. एक ओर राष्ट्रमंडल खेलों से लेकर 2जी स्पैक्ट्रम आवंटन में हुए घोटाले के आरोप और उससे बाहर निकलने की चुनौती है और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ताक़त को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं.

तो दूसरी ओर विकीलीक्स के दस्तावेज़ों से सामने आईं बाते हैं. हिंदू चरमपंथ के सवाल पर कांग्रेस को रास्ता तलाश करना होगा. इन्ही में से एक दस्तावेज़ से ज़ाहिर हुआ है कि अमरीका ने वर्ष 2007 में भेजे गए एक राजनयिक संदेश में सोनिया गांधी में सैद्धांतिक नेतृत्व के अभाव का जिक्र किया गया है.

विकीलीक्स के अनुसार सोनिया गांधी ने 2007 में अमेरिकी राजनयिक से निजी बातचीत में कहा था कि नेहरू-गांधी परिवार की धरोहर को बचाने की मजबूरी के चलते राजनीति में आना पड़ा. जबकि एक राजनयिक संदेश में कहा गया है कि वर्ष 2009 में राहुल गांधी ने हिंदू आतंक को इस्लामी आतंक से ज्यादा खतरनाक बताया था.

विकीलीक्स के ये संदेश ऐसे समय में सार्वजनिक हुए हैं जब पार्टी अपने वरिष्ठ महासचिव दिग्विजय सिंह के उस बयान पर सफ़ाई ही दे रही थी जिसमें उन्होंने मुंबई एटीएस के प्रमुख हेमंत करकरे से अपनी बातचीत का हवाला देते हुए 'हिंदू आतंकवाद' पर निशाना साधा था.

ख़बरें हैं कि पार्टी इस महाधिवेशन में 'हिंदू आतंकवाद' पर भी चर्चा करेगी और इस तरह के बयानों से हिंदू मतदाताओं के मन में उपज रही नाराज़गी से बचने का रास्ता भी तलाश करेगी.

इसके अलावा पार्टी को हाल ही में बिहार में मिली क़रारी हार के बाद अगले साल यानी वर्ष 2011 में तमिलनाड़ु, पुद्दुचेरी, केरल, असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारी करनी है.

संवाददाताओं का कहना है कि पार्टी के कार्यकर्ता चाहेंगे कि जब वे इस महाधिवेशन से लौटें तो उनके पास हर उस सवाल का जवाब हो जो पार्टी से पूछे जा रहे हैं और साथ में यह रणनीति हो कि अगले साल के इन चुनावों में पार्टी किस तरह उतरेगी और सोनिया गांधी को यह दिखाना है कि उनमें सैद्धांतिक नेतृत्व का अभाव नहीं है, जैसा कि विकीलीक्स के दस्तावेज़ में कहा गया है.

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