नीरा राडिया ने कैसे लगाया देश को अरबों का चूना?
राडिया के बारे में तफ्तीश करते करते हमें राडिया के जीवन के कई अहम पहलू पता चले, जिसके बारे में आपको भी जानना बेहद जरूरी है। नीरा राडिया का जन्म केन्या में हुआ था। वो पहले नीरा शर्मा के नाम से जानी जाती थी। और अपने माता-पिता के साथ लंदन में रहती थीं। उसके पिता सिविल एविएशन क्षेत्र से जुड़े हुए थे। नीता ने गुजराती मूल के ब्रिटिश व्यापारी जनक राडिया से विवाह किया और वो नीरा शर्मा से नीरा राडिया बन गई। लेकिन उनका वैवाहिक जीवन बहुत लंबा नहीं चला, हालाकि उनकी तीन संताने भी हुई लेकिन फिर भी नीरा का अपने पति से तलाक हो गया जिसके बाद वो भारत आ गई। और इस समय वो भारत की राजधानी दिल्ली के छतरपुर में एक आलीशान फार्म हाउस में रहतीं है।
हिन्दी न्यूजवेब साइट भास्कर के मुताबिक नीरा राडिया 1995 में भारत आयी थीं। और वो उस समय सहारा समूह के लिए लाइजन का काम किया करती थीं। ये उनकी भारत में पहली जॉब थीं। इसी के बाद वो सफलता की सीढ़ियां चलती गई और धीरे-धीरे वो यूके एयर, केएलएम और सिंगापुर एयरलाइंस की भारत में प्रतिनिधि बन बैंठीं। लेकिन कहते हैं ना लालच का घड़ा कभी नही भरता है, सो राडिया यहां भी नहीं थमीं और उन्होंने क्राउन एक्सप्रेस के नाम से अपनी एयरलाइन शुरू करने की इच्छा जाहिर की। लेकिन वो पूरी नहीं हो पायी। ये बात सन् 1997 की है। आप सोच सकते है कि दो साल के अंदर राडिया ने किस तरह अपना प्रभुत्व भारत में जमा लिया था। तब तक राडिया के खास और करीब मित्र बन बैठे थे केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अनंत कुमार, जिसके चलते राडिया चाहती थीं कि उन्हें हवाई जहाज खरीदने की इजाजत दे दी जाए।
लेकिन ऐसा हो नहीं पाया और अनंत कुमार को सिविल एविएशन से हटाकर पर्यटन मंत्रालय दे दिया गया और क्राउन एक्सप्रेस की राडिया की चाह अधूरी रह गई। इसी दौरान उनकी मुलाकात रतन टाटा से हुई जिनका टाटा-सिंगापुर एयरलाइंस शुरू करने का प्रयास भी विफल हो गया था। दोनों में जान-पहचान इतनी बढ़ी कि 2001 में रतन टाटा ने टाटा समूह की सभी 90 कंपनियों का सरकार और मीडिया से लायजन (काम कराने या छपवाने का ठेका) राडिया को दे दिया। अगले नौ सालों में राडिया ने चार कंपनियां खोल दीं - वैष्णवी कम्यूनिकेशन, नोएसिस स्ट्रैटजिक कंसल्टिंग लिमिटेड, विटकॉम और न्यूकॉम कंसल्टिंग। 2008 में देश के सबसे धनी आदमी - मुकेश अंबानी - ने भी अपने लिए लॉयजनिंग का काम उन्हें दे दिया। एक अनुमान के अनुसार उनकी चार कंपनियों के पास देश की 150 से भी अधिक बड़ी कंपनियों के लिए लायजनिंग का ठेका है और उनका सालाना व्यापार चार सौ करोड़ रुपए का हो गया है।
अब आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि कैसे फर्श से अर्श पर पहुंची नीरा राडिया ने देश को अरबों का चूना लगा दिया। सिर्फ 15 सालों में हुई वो अरबपति बन बैठी है, जाहिर उसके पास जो पैसा है, वो ईमानदारी और मेहनत का नहीं है, ये तो एक नीरा है जिसने देश को लूटा है, ना जाने अभी कितनी राडिया, राजाओं के साथ मिलकर देशको लूट रही होगी।...
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