मानसिक रूप से विक्षिप्त है 'ब्लेडबाज'!

नई दिल्ली। सोमवार को खबर आयी कि राजधानी के मंगोलपुरी इलाके में राह चलती लड़कियों पर ब्लेड से हमला करने वाले पकड़े गए हैं। पुलिस ने संडे रात में मंगोलपुरी के ए ब्लॉक में विशाल उर्फ शालू (22) और उसके दोस्त रोहित कुमार (26) को गिरफ्तार किया। ये दोनों राह चलते लड़कियों पर ब्लेड से हमला कर देते थे। ये तो एक खबर है जो कुछ दिन चर्चा में रहेगी लेकिन कुछ दिनों बाद खत्म हो जायेगी। दोषियों को सजा मिल जायेगी और बस मामला खत्म हो जायेगा।

लेकिन क्या कभी आपने सोचा है इस अपराध के पीछे कारण क्या है? दोषियों को सजा मिलने से एसे अपराध खत्म नहीं होने वाले । भले ही आज अपराधी पुलिस के शिकंजे में हैं। लेकिन कल का क्या ? कल जब वो जेल से बाहर आते हैं तो फिर से वो, वो ही काम करेंगे जो आज कर रहे हैं। इसलिए यहां सोचना ये चाहिए कि ऐसे अपराधों को रोका कैसा जाये?

दिल्ली में पकड़ा गया विशाल के जीवन पर जरा गौर फरमाते हैं। दरअसल विशाल पहले ऐसा नहीं था, वो कुछ समय पहले एक लड़की से प्यार करता था लेकिन उसकी किसी गलत हरकत की वजह से लड़की ने उसका साथ छोड़ दिया। विशाल के चेहरे पर एक मार्क है जिसकी वजह से वो लोगों की आलोचना का केन्द्र बचपन से ही रहा है। जब उसकी प्रेमिका ने उसका छोड़ा तो उसके पीछे भी उसे यही कारण लगा कि वो सुंदर नहीं है, इसलिए उसके साथ ऐसा हुआ। नतीजा ये हुआ कि विशाल को अपने आप और लड़की जात से बेहद नफरत हो गई जिसके चलते उसने लड़कियों पर ब्लेड से वार करना शुरू कर दिया। ताकि वो लड़कियों के चेहरे पर वैसे ही मार्क बना सके जिसकी वजह से वो लोगों को पसंद नहीं हैं।

तो देखा आपने अवसाद और क्रोध इंसान को किस तरह से हैवान बना सकते हैं। आगरा की मशहूर मनोवैज्ञानिक गीता पांडे से जब हमने इस विषय पर बात की तो उनका कहना था कि ऐसे केस मनोरोगियों की देन होते हैं। हमारे पास ऐसे बहुत सारे केस आते हैं जो ऐसे ही हैरत अंगेज लेकिन भयानक जुर्म में लिप्त होते हैं। जब भी हम उनके इस भयानक रवैये के बारे में जानने की कोशिश करते हैं तो हमें उनके साथ अतित में हुए कई कड़वी सच्चाईयों से वाकिफ होना पड़ता है। ऐसे में जरूरत है कि विशाल और रोहित जैसे अपराधियों को जेल में पुलिस के पास नहीं बल्कि मनोचिकित्सक के पास लाना चाहिए। ताकि समाज में हो रहे घृणित अपराध को रोका जा सके।

बलात्कार खुद अपने आप में एक मनोरोग का उदाहरण है। मानसिक रूप से विक्षिप्त लोग ऐसी घटना को अंजाम देते हैं। ब्लेड से लड़कियों पर हमला करना, लड़कियों पर तेजाब फेंकना, लडकियों को सिगरेट से जलाना ये सभी घिनौने मनोरोग के उदाहरण है। अगर समाज को इस कंलकित अपराध से दूर रखना है और लड़कियों-महिलाओं को भयमुक्त तो सरकार, पुलिस, समाज सेवी संस्थाओं को कमर कसनी होगी ताकि अवसाद ग्रस्त लोगों को चिन्हित किया जाये और उनका इलाज किया जा सके। क्योंकि मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों के लिए केवल जेल की सजा काफी नहीं है। और हां इस पूरे काम में मीडिया को भी भरपूर और सार्थक मदद करनी होगी क्योंकि उसका काम केवल खबरें प्रसारित करना नहीं है बल्कि समाज को जागरूक करना भी है।

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