आदर्श घोटाला : महाराष्ट्र के 17 अधिकारियों को नोटिस

मुम्बई। आदर्श को-आपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी घोटाला मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को 17 नौकरशाहों को 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया। इनमें से अधिकांश भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं जो इस सोसाइटी के सदस्य भी हैं।एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि प्रशासनिक सेवा के 11 अधिकारियों को नोटिस भेजा जा चुका है। शेष चार अधिकारियों को जल्द ही नोटिस भेजा जाएगा।

जिन नामचीन शख्सियतों को नोटिस दिया गया है, उनमें पूर्व मुख्य सचिव डी.के. शंकरन, शहरी विकास विभाग के दो पूर्व अधिकारी सचिव रामानंद तिवारी एवं उप सचिव पी.वी. देशमुख तथा मुम्बई नगर निगम के पूर्व आयुक्त जयराज पाठक शामिल हैं।नौकरशाहों को मुख्य सचिव जे.पी. डांगे द्वारा भेजे गए नोटिस में सरकार को जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।

अन्य सवालों के अलावा नौकशाहों से यह भी पूछा गया है कि किन परिस्थितियों में वे आदर्श को-आपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के सदस्य बने और दक्षिणी मुम्बई के पॉश कोलाबा इलाके के 6,500 वर्ग मीटर दायरे में बनी 31 मंजिली इमारत में साधन संपन्न फ्लैटों के लिए खर्च किए उनके धन का स्रोत क्या है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि सोसाइटी की सदस्यता लेने से पहले क्या उन्होंने सरकार से अनुमति मांगी थी?
ज्ञात हो कि मुख्य सम्पत्ति पर अधिकार जमाने के लिए नौकरशाहों और राजनेताओं की सांठगांठ से आदर्श हाउसिंग घोटाला किए जाने का आरोप लगने के बाद मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को अपना पद छोड़ना पड़ा था।

उल्लेखनीय है कि मूलत: कारगिल युद्ध के शहीदों की विधवाओं एवं वीरों के लिए बनी आदर्श सोसाइटी की 31 मंजिली इमारत में अशोक चव्हाण के तीन रिश्तेदारों को फ्लैट आवंटन की बात उजागर होने पर यह मामला प्रकाश में आया।

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