ग़ज़ा के हालात में कोई सुधार नहीं:यूएन

इसी साल जून में इसराइल ने घोषणा की थी कि वो ग़ज़ा पर से कुछ प्रतिबंधों को उठा लेगा और खाने पीने के सामान तथा रोजाना इस्तेमाल में आने वाली चिज़ों को अंदर आने देगा. बीबीसी संवाददाता जॉन डॉनीसन के अनुसार लगभग पांच महिनें गुज़र गए हैं जब इसराइल ने एलान किया था कि वो ग़ज़ा की आर्थिक नाकेबंदी में कुछ ढील देगा.
इसराइल ने ये क़दम अंतरराष्ट्रीय दबाव में उठाया था जब गज़ा में राहत का सामान ले जा रहे जहाज़ी बेड़े पर इसराइली सैनिक कार्रवाई में नौ तुर्की नागरिकों की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद पूरी दुनिया में इसराइल की घोर निंदा हुई थी और इसी अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण इसराइल ने ग़ज़ा में थोड़ी ढील देने का फ़ैसला किया था.
ग़जा में संयुक्त राष्ट्र ऑपरेशन के प्रमुख जॉन गिंग ने बीबीसी को बताया कि बहुत कम लोगों ने किसी बदलाव को महसुस किया है. गिंग के अनुसार, ''लोगों के ज़मीनी हालात में कोई फ़र्क़ नहीं आया है.ना तो उनकी निर्भरता में कोई कमी आई है ना ही किसी तरह का पुनर्निर्माण हुआ हैं और ना ही उनकी आर्थिक स्थिति में कोई बेहतरी हुई है. ग़ज़ा नाकेबंदी में ढील दर असल इसराइल और मिस्र पर राजनीतिक दबाव को कम करने से ज़्यादा कुछ नहीं था.''
अब ग़ज़ा में ज़्यादा इसराइली सामान ले जाने की इजाज़त है लेकिन अभी भी ग़ज़ा में किसी तरह के निर्यात पर पाबंदी है जिसने ग़ज़ा की अर्थव्यवस्था को चरमरा दिया है. अब भी फ़लस्तीनियों के लिए इसराइली अधिकारियों से ग़ज़ा छोड़ने की इजाज़त लेना अत्यंत कठिन है.
जॉन गिंग ने इसराइल पर आरोप लगाया कि वो ग़ज़ा की नाकेबंदी उठाने की अंतरराष्ट्रीय जगत की मांग की अनदेखी कर रहा है. लेकिन इसराइली विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ईगल पॉलमोर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र असल मुद्दे को समझने मे चूक कर रहा है. पॉलमोर ने एक मिसाल देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र कमरे में हाथी घुसे होने की बात करने से इनकार करता है.ग़जा से सामानों के निर्यात या आयात पर आख़िर क्यों दिक्क्त है.सीमा को क्यों सील किया गया है.क्योंकि उस जगह पर एक घोषित चरमपंथी संगठन का क़ब्ज़ा है.
2007 में इस्लामी गुट हमास के सत्ता में आने के बाद से इसराइल ने ग़जा की आर्थिक नाकेबंदी को और सख़्त कर दिया था. इसराइल, अमरीका और यूरोपीय संघ हमास को एक चरमपंथी संगठन मानते हैं.












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